अध्याय 9-एक इफेक्टिव लिसनर कैसे बनें

सिर्फ सुनना और एक प्रभावी तौर पर सुनने  में फर्क है । सुनने से मतलब  उन आवाज़ों  से है जो आपके कानों में पहुँचती हैं। यह एक शारीरिक प्रक्रिया है जो अपने आप होती है।

सुनना का अर्थ है कि संदेशों को ठीक तरह  से प्राप्त करना  और उसको सही प्रकार से समझने की क्षमता है। एक अच्छा लिसनर केवल वही नहीं सुनेगा जो कहा जा रहा है बल्कि वह वो भी सुनेगा जो अनकहा रह गया या सिर्फ  इशारो  से कहा गया है।

इसलिए, प्रभावी तरीके से सुनने में शरीर की भाषा, verbal या  non-verbal संदेशों के साथ-साथ किसी भी समय क्या कहा जा रहा है, को सिर्फ observe करना ही नहीं है बल्कि उनमे discrepancies  को देखना भी शामिल है।

इसलिए सुनने में केवल कानों का ही नहीं, आंखों का भी उपयोग करना चाहिए।

Quiz

1. जब आप किसी से बात कर रहे होते हैं तो सुनते हैं कि क्या कहा जा रहा है लेकिन उनके अनकहे शब्दों के अर्थ को समझने की कोशिश नही करते।
2. जब कोई और बात कर रहा होता है, तो आप कभी-कभी बीच में आकर उनके वाक्यों को पूरा करने की कोशिश करते हैं।
3. जब दूसरे व्यक्ति ने आपसे बात करना समाप्त कर दिया है, तो आप तुरंत कोई initiative शुरू नहीं करते हैं। आप पहले यह सुनिश्चित कर लेंते हैं कि आपने उनका संदेश ठीक से प्राप्त कर लिया है या नहीं
4. जब दूसरा व्यक्ति आपसे बात कर रहा होता है, तो unrelated विचार आपके दिमाग में चलते रहते हैं और आप उन संदेशों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं जो communicate किए जा रहे हैं।
5. आप यह दिखाने के लिए वक्ता के साथ आँख से संपर्क बनाए रखते हैं कि वह जो भी कह रहे हैं उसे आप सुन और समझ रहे हैं। आप अनावश्यक रुकावटों से बचते हैं और केवल जो कहा जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
6. जब वक्ता की अजीब आदतें और तौर-तरीके होते हैं तो आप विचलित हो जाते हैं, आप चिढ़े बिना धैर्य से नहीं सुन सकते
7. यदि वक्ता कुछ ऐसा कहता है जिससे आप असहमत हैं - तो आप जो कहा गया है उसका विरोध करने के लिए तुरंत एक तर्क तैयार करते हैं और प्रतीक्षा किए बिना अपने विचार व्यक्त करते हैं।

 

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