Depression के कारण

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Synopsis

डिप्रेशन के कारण समझकर ही इसका उचित निराकरण किया जा सकता है। डिप्रेशन के कई कारण हो सकते हैं।

डिप्रेशन के निम्नलिखित कारण होते है —

१.परिवार में डिप्रेशन की हिस्ट्री,

२. ड्रग्स और शराब आदि नशे का सेवन,

३. जीवन में अनचाहा दबाव,

४. गंभीर बीमारी जनित डिप्रेशन,

५. जीवन में घटित कोई घातक दुर्घटना,

६. किसी निकटवर्ती के गुज़र जाने के कारण से लगा आघात,

७. अकेलापन,

१.परिवार में  डिप्रेशन की हिस्ट्री:

हमारे मष्तिष्क में मौजूद केमिकल्स की बैलेंसिंग में परिवर्तन होने के कारण हम डिप्रेशन के शिकार होते है|

ये केमिकल्स  न्यूरोट्रांसमीटर्स होते  है, जिन्हे  हम सेरोटोनिन और डोपामाइन के नाम से जानते है|

मष्तिष्क में मौजूद न्यूरोट्रांसमीटर्स संतुलित मात्रा में सेरोटोनिन और डोपामाइन का उत्पादन करते है,  जिससे हमारा मन प्रसन्न  रहता है|

यदि परिवार में किसी को डिप्रेशन की बीमारी रही हो तो, उस परिवार के सदस्यों के डिप्रेशन से प्रभावित होने की संभावना ज्यादा होती है|

ऐसे में न्यूरोट्रांसमीटर्स सही मात्रा में इन केमिकल्स को प्रोड्यूस नहीं करता है|

२. ड्रग्स और शराब आदि नशे का सेवन|

किसी भी प्रकार के नशे जैसे ड्रग्स, शराब, आदि के सेवन से हमारे मष्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन और डोपामाइन का आवश्यक संतुलन बिगड़ जाता है|

लगातार लम्बी अवधि तक इनके प्रयोग से इन केमिकल्स की उत्पादन प्रक्रिया ही प्रभावित हो जाती है|

धीरे धीरे व्यक्ति को डिप्रेशन की तरफ धकेलती जाती है|

ब्रेन के स्कैन का अध्ययन कर यह पाया गया है, कि नशे के कारण ब्रेन केमेस्ट्री पर हुए दुष्प्रभाव को सामान्य होने में महीनो का समय लगता है|

३. जीवन में अनचाहा दबाव|

जीवन में हर किसी की चाहत होती है कि वह प्रसन्न रहे, खुश रहे और इसे पाने का रास्ता यह है कि उसकी सारी इक्क्षाए और आकांक्षाये उसके मनचाहे समय पर पूरी होती जाय|

एक ऐसे जगत की कल्पना करे जहाँ हर व्यक्ति अपनी इच्क्षित वस्तु को सहजता से प्राप्त कर ले जैसे, विद्यार्थी बिना ढंग से पढ़े ही परीक्षा में अच्छे नंबर पा जाये,

बिना जिम में पसीना बहाये,

बिना सुबह दौड़ लगाए ही स्वास्थ बन जाए,

असंयमित खान पान कारण हम कभी बीमार न पड़े,

और हर व्यक्ति को उसकी मनचाही नौकरी मिल जाय|

समस्त जगत में शांति हो, झगडे न हो, दैवीय आपदा घटित न हो, दुर्घटनाये न हो तथा सर्वत्र खुशहाली हो|

ऐसी कल्पना हमारे आनंद का कारण हो सकती है पर वास्तव में क्या ऐसा होता है??????

वास्तव में यदि देखे तो हर कोई अपने जीवन के किसी न किसी पहलु पर उलझा हुआ है, असहज है|

कोई नौकरी के कारण तनाव में है, कोई पढाई को ले कर तो कोई आपसी सम्बन्ध को ले कर,

बीमारी से परेशान है,

कोई भ्रष्टाचार का शिकार है,

आतंक का मारा है,

तो कोई प्रणाली से परेशान है|

यानि हर किसी को जीवन के किसी न किसी क्षेत्र में कोई दुःख, कोई पीड़ा, कोई तनाव जरूर है|

कुछ लोग आंतरिक कारको जैसे आत्म सम्मान की कमी या अपनी नकारात्मक सोच से परेशानी उठाते  है|

अच्छी जीवन शैली, सकारात्मक सोच, विपरीत परिस्थितियों का सही ढंग से सामना कर सकने की क्षमता द्वारा जो लोग इन परेशानियों से काबू पा सकते है|

वो काफी हद तक तनाव मुक्त जीवन जीते है| परंतु कुछ लोग इन्ही परेशानियों से इतना घिर जाते है कि धीरे धीरे उनमे निराशा का संचार बढ़ने लगता है और वे डिप्रेशन आ जाते है |

४. गंभीर बीमारी जनित डिप्रेशन|

लम्बे समय तक चलने वाली बीमारियां अथवा असाध्य रोगो से ग्रसित व्यक्ति भी जीवन के प्रति निराशा के कारण अवसाद में चला जाता है और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है|

कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी डिप्रेशन होने लगता है | कुशल चिकित्सक की सलाह द्वारा इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है |

५. जीवन में घटित कोई घातक दुर्घटना|

जीवन में घटित कोई ऐसी घटना जिसका प्रभाव व्यक्ति के दिमाग पर गंभीर रूप से हुआ हो उसके कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है|

बहुत बार देखा गया है कि बच्चो का उनकी इच्छा के विपरीत स्कूल चेंज करवा देना, एक्सीडेंट अथवा कोई अन्य भयानक दृश्य देख लेना, कोई यौन दुर्घटना, तलाक या कोई अन्य भावनात्मक प्रभाव व्यक्ति को डिप्रेशन में ले जा सकता है |

६. किसी निकटवर्ती के गुज़र जाने के कारण लगा आघात

किसी प्रिय व्यक्ति की मौत की वजह से लगा मानसिक आघात भी कई बार डिप्रेशन का कारण बन जाता है|

७. अकेलापन

समाज या परिवार से कट जाना, जीवन में अकेलापन भी डिप्रेशन का एक बड़ा कारण होता है|

विशेषकर ऐसे बुजुर्गो में जो समाज या परिवार से दूर हो गए है तथा एकाकी जीवन जी रहे है उनमे एकाकीपन के कारण डिप्रेशन की समस्या बहुतायत में आज कल दिखती है|

 

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Anshu Shrivastava

Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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