मुझे Exam के भय से कैसे छुटकारा मिलेगा?

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Synopsis

जब खुद अपने परिणाम को स्वीकार करेंगे, खुद को स्वीकार करेंगे, तो इस बात की परवाह नहीं होगी कि दूसरे आप के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।

आशंका और भय – मुझे Exam के भय से कैसे छुटकारा मिलेगा?

अधिकांश लोगों को विभिन्न चीजों और स्थितियों का डर होता है।

आपने सुना होगा कि कुछ लोग तैराकी में भाग लेने से डरते हैं क्योंकि उन्हें पानी से डर लगता है।

कुछ में ऊंचाई का भय होता है।

अधिकांश छात्रों में परीक्षा का भय होता है।

मुझे भी परीक्षा का भय होता था।

मैं सपना देखती थी कि मुझे परीक्षा केंद्र या स्कूल के लिए देर हो चुकी है।

और जब मैं वहां पहुंचने के लिए दौड़ने लगती हूं, तो ऐसा लगता जैसे मेरे पैर जमीन पर टिक गए हैं। 

बहुत संघर्ष के बाद जब मैं स्कूल पहुंचती हूं, तो देखती हूं कि गेट बंद हो गया और चौकीदार गेट नहीं खोल रहा है।

तब मैं उनसे विनती करती कि मुझे अंदर जाने दो।

बहुत मुश्किल से वह गेट खोलता है।

और जब मैं परीक्षा कक्ष में पहुँची तो मैंने देखा मेरे सहपाठी पेपर लिखने में व्यस्त थे।

लंबे इंतजार के बाद और अपने शिक्षक के सख्त लुक का सामना करने के बाद, मैंने पेपर लिखना शुरू किया और तब मुझे पता चला कि मैंने गलत विषय के लिए तैयारी की थी और किसी भी प्रश्न का प्रयास करने में सक्षम नहीं थी।

क्या आप इस चरमोत्कर्ष की कल्पना कर सकते हैं - मैं परीक्षा में असफल हो गयी और मेरे सभी दोस्तों को अगली कक्षा में पदोन्नत कर दिया गया।

मुझे कितना दुख हुआ यह तो सभी समझ सकते हैं !

लेकिन वास्तव में, ऐसा कभी नहीं हुआ क्योंकि यह एक सपना था।

ऐसी घटना कभी भी नहीं हुई बस आशंका बनी रहती थी।

इस तरह की आशंकाओं के कारण क्या हो सकते है:

 

१. अनुवांशिक लक्षण

इसके लिए जिम्मेदार कुछ आनुवंशिक कारक हो सकते हैं। कुछ लोगों में तनाव और चिंता करने का एक कारण अनुवांशिक भी हो सकता है।

२. व्यक्तिगत तनाव

व्यक्तिगत तनाव भी इस समस्या को ट्रिगर कर सकता है।
उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति, एक बार अंधेरे कमरे में फंस जाने के कारण बाद में अंधेरे स्थानों से भयभीत हो सकता है।

इन व्यक्तिगत तनावों के कई कारक हो सकते हैं –


- अपने अभिभावक, टीचर और सोसायटी के द्वारा दिया गया तनाव और भय बच्चों के मन में परीक्षा की तरफ एक डर पैदा कर देता है। कई बार अभिभावकों की अपेक्षा बच्चे की क्षमता से कहीं ज्यादा होती है तो वह बच्चे के मन में एक तरह का डर पैदा हो जाता है।


- बच्चे अपने साथ के ग्रुप से भी काफी तनाव में रहते हैं। उनका दबाव रहता है कि अगर उन्होंने अच्छा नहीं किया परीक्षा में तो उनका मजाक बन सकता है। बच्चे कई बार टीचर से भी डरते हैं कि वो उनको क्लास में शर्मिंदा करेंगे।


- कभी-कभी तो बच्चे अपने खुद के प्रदर्शन की वजह से दबाव में रहते हैं। और उसको मेंटेन करने के लिए उनके मन में अपने आप भी तनाव पैदा हो जाता है।


- परीक्षा की तैयारी ठीक से ना होने की वजह डर पैदा हो जाता है। सब कुछ पढ़ लेने के बाद भी कई बार बच्चों को आत्म विश्वास नहीं आता और इस आत्मविश्वास की कमी उनके अंदर डर पैदा कर देती है।

३. पलायन की प्रवृति

किसी-किसी बच्चों में कोई साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम होती है जिसकी वजह से बच्चों के मन में एग्जाम को लेकर बहुत डर पैदा हो जाता है। उन्हें हर वह चीज परेशान करती है जिसे करना कठिन होता है।

इस डर को दूर करने के उपाय क्या है?

 

१. अनचाहे दबाव से बचे

सबसे पहले डर का कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए।

अगर यह डर अभिभावकों और टीचर के कारण है तो अभिभावकों और टीचर्स को यह समझना चाहिए कि बच्चों को परीक्षा का कोई दबाव ना पैदा करें।

उन्हें अच्छी तरह पढ़ने के लिए प्रेरित करें परंतु परीक्षा और उसके परिणाम के बारे में कोई दबाव ना डालें।

इसे सरलता से लेने के लिए उन्हें प्रेरित करें।

इसमें अभिभावकों का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता है।

अगर अभिभावक खुद भी कोई दबाव नहीं लेते तो बच्चे भी दबाव मुक्त हो जाते हैं।

२. अच्छे दोस्त बनाये

बच्चों का अपने ग्रुप के दूसरे बच्चों से जो दबाव पैदा होता है, तो उसके लिए वह ऐसे बच्चों से दूर रहे जो उनका मजाक उड़ाते हो।

३. टीचरों का उत्तरदायित्व

परीक्षा आने वाली हो तो टीचर्स को सुव्यवस्थित ढंग से परीक्षा की तैयारी करने के उपाय बताने चाहिए।

वह कम समय में ज्यादा अच्छी तरह से कैसे पढ़ाई कर सकते हैं।

पढ़ाई करते समय उनको अपने खानपान एक्सरसाइज खेलना इन सभी चीजों पर भी ध्यान देना चाहिए।

टीचर्स को इस बात की अलग से टिप्स बच्चों को देनी चाहिए।

परीक्षा को एक डर पैदा करने वाला कारक ना बता कर एक सरल विधि के रूप में प्रस्तुत करें ताकि बच्चों का तनाव कम हो।

परीक्षा में उत्तरों को अच्छी तरह से लिखना सिखाएं।

यदि बच्चों की तैयारी स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ अच्छी हो जाती है, तो उनके मन में परीक्षा को लेकर डर काफी कम हो जाता है।

४. परिवार का माहौल

घर में भी माहौल खुशनुमा और सहयोगी होना चाहिए।

किसी भी बच्चे से तुलना नहीं होनी चाहिए और परीक्षा का परिणाम कैसा होगा उसके बारे में कोई चर्चा नहीं होनी चाहिए।

५. चिकित्सक की सलाह

इतना सब करने के बाद भी अगर बच्चों के मन में तनाव है, तो इसका मतलब है कि कोई साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम है।

जिसके लिए किसी चिकित्सक से मिलना अति आवश्यक है।

किसी भी बीमारी की संभावना को दूर करने के लिए मेडिकल चेकअप भी करवा सकते हैं।

६. आशंकाओं का डट कर मुकाबला करे।

सभी मनुष्यों के लिए जीवन निश्चित प्रणाली में नहीं चलता है।

यह कोई नहीं जानता कि वह कब तक रहने वाला है।

यह एक सार्वभौमिक सत्य है और सभी पर लागू है।

इसलिए आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है।

व्यक्तिगत तनाव भी इस समस्या को ट्रिगर कर सकता है।

उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति एक बार अंधेरे कमरे में फंस जाने के कारण बाद में सभी अंधेरे स्थानों से भयभीत हो सकता है।

केवल तार्किक रूप से सोचें तो आप पाएंगे कि आप जो कुछ भी महसूस करते हैं, वह आपके भीतर कुछ आशंकाओं के कारण है।

आशंकाओं का डटकर सामना करें और उनके कारणों को पहचाने।

आशंकाओं के साथ लड़ने का अगर बैकअप प्लान आपके पास तैयार है तो अवश्य ही डर कम हो सकता है।

जैसे अगर परीक्षा का परिणाम आपकी उम्मीद से कम आया हो तो अपने अभिभावक के साथ सहपाठियों से सामना करने की हिम्मत रखिए क्योंकि यह आखिरी परीक्षा नहीं है।

आगे भी आप परीक्षा देकर बेहतर परिणाम ला सकते हैं।

अगर अपनी उम्मीद पर खरे नहीं उतरे हैं, तो अपने आप से निराश होने के बजाय अगली परीक्षा में बेहतर करने का प्रण करके ऊर्जा से लग जाइए।

अगर आपकी क्षमता इतनी ही है तो अपनी क्षमताओं से नाराज ना हो दुखी भी ना हो और ना निराश हो।

क्षमताएं सीमित होती हैं और उनको मेहनत करके बढ़ाया जा सकता है।

जो प्राप्त हुआ है, उसको स्वीकार करके भविष्य में बेहतर करने के लिए और मेहनत करें और जो परिणाम आता है, उसको सहर्ष स्वीकार करें।

जब खुद अपने परिणाम को स्वीकार करेंगे, खुद को स्वीकार करेंगे, तो इस बात की परवाह नहीं होगी कि दूसरे आप के साथ कैसा व्यवहार कर रहे हैं।

७. हमेशा सहज रहें।

परीक्षा को सहज रूप से लें उसके परिणाम को सहज रूप से और सहर्ष स्वीकार करें।

तुलना से बचे क्योंकि हर व्यक्ति का अपनी क्षमताओं के अनुसार कार्य करना चाहिए।

हर एक की क्षमता के अनुसार जीवन के साधन मौजूद है।

स्वयं को दूसरे की तराजू में डाल कर ना तौले।

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Anshu Shrivastava

Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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