बच्चों में स्कूल जाने का डर कैसे दूर करें

Kids going to school
Kids going to school

Synopsis

बच्चे जब स्कूल जाना शुरू करते हैं तो स्कूल जाते समय वह कई बार वो बहुत डरते है या रोते हैं। लेकिन धीरे-धीरे उनकी आदत पड़ जाती है और वह ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो पहले तो स्कूल में एडजस्ट हो जाते हैं लेकिन जब बड़े होने लगते हैं तो उनका स्कूल जाने का मन नहीं करता है। और वह रोना भी स्टार्ट कर देते हैं और उनको स्कूल जाने का डर सताने लगता है।

ऐसे में पेरेंट्स के लिए बड़ी मुश्किल होती है कि बच्चों को कैसे मना के उनको स्कूल भेजा जाए या उनके दिल से स्कूल जाने का डर दूर करें । अगर किसी तरह उन्हें तैयार करके भेज भी देते है तो फिर पेरेंट्स का भी मन अच्छा नहीं होता है, क्योंकि बच्चे दिल से नहीं गए हैं रोते हुए गए हैं। ऐसी स्टेज में पेरेंट्स को क्या करना चाहिए कि बच्चे बिना रोए बल्कि खुशी से स्कूल जाए।

बच्चों को स्कूल भेजने से पहले पैरेंट को क्या करना चाहिए :

उन्हें धीरे से स्कूल से फेमिलिअर करवाएं :

सबसे पहले समझते हैं कि जब बच्चे स्कूल जाना स्टार्ट करते हैं, उस समय क्या करना चाहिए। बच्चे जब छोटे हैं तो आपसे अटैच होते है। वह मोस्ट ऑफ द टाइम आपके साथ रहते हैं। फिर जब स्कूल में अचानक उनको थोड़ी देर आपसे अलग रहना होता है, जिससे कि वह कंफर्टेबल नहीं फील करते हैं। ऐसे में आप स्कूल में एकदम से मत छोड़िए। स्कूल में बात करिए अगर वह अलाउ करते हैं तो कुछ देर आप वहां वेट कर सकते हैं। जिससे बच्चा धीरे-धीरे स्कूल से एडजस्ट हो जाए और स्कूल जाने का डर भी दूर हो जाएगा ।

बच्चों को स्कूल दिखाएं और बताएं :

आप यह कर सकते हैं, कि जब आप स्कूल में एडमिशन कराते हैं तो कुछ दिनों के लिए पहले आप स्कूल में उसको ले जाएं, उसे उसका क्लासरूम दिखाएं, बिल्डिंग दिखाएं, वहां की टीचर्स को दिखाएं जिससे बच्चा उस माहौल को थोड़ा सा समझ ले और स्कूल के बारे में कुछ अच्छी-अच्छी बातें बताए, कि स्कूल जाओगे तो तुम्हारे साथ ये होगा, तुम्हें स्टोरी सुनने को मिलेगी, खेलने को मिलेगा, फ्रेंड्स मिलेंगे ताकि बच्चा अट्रैक्ट हो। स्कूल में बहुत कुछ अच्छा होने वाला है, तो यह तो हुआ छोटे बच्चों के लिए।

अगर बड़े बच्चे स्कूल जाने से मना करें तो :

ना जाने के कारण का पता लगाएं :

लेकिन जो बच्चे ऑलरेडी स्कूल जा रहे हैं और वह किसी वजह से उनका भी दिल ऊब जाए और आप देख रहे हैं कि बच्चे बहुत दुखी होकर स्कूल जाते हैं। कई बार आपको डांटना पड़ता है, समझाना पड़ता है, तब वह स्कूल जाते हैं l

ऐसे में आपको क्या करना चाहिए ?

कही बच्चा बुली तो नहीं हो रहा ?

इसके लिए आप देखे कि ऐसा तो नहीं कि बच्चे स्कूल में किसी से परेशान हो रहे हो। यानी कि कोई बच्चे उनको परेशान कर रहे हैं या किसी टीचर से उनको कोई प्रॉब्लम है। इसको समझने की कोशिश करें और उसके लिए स्कूल जाकर आप बात कर सकते हैं।

कोई सब्जेक्ट समझ से बाहर तो नहीं हो रहा ?

सेकंड, हो सकता है कि बच्चा किसी पर्टिकुलर सब्जेक्ट में थोड़ा वीक हो, उसको समझ ना आ रहा हो और वह क्लास में पीछे होता जा रहा है, तो इससे भी बच्चों का कॉन्फिडेंस भी कम हो जाता है और उनका कोई काम नहीं होता है।

आप उसको हेल्प करिये :

अगर ऐसा है तो उसकी पढ़ाई में आप इंटरेस्ट लीजिए और जिसमें वह वीक है उस सब्जेक्ट्स में हेल्प करिए। अगर वह धीरे-धीरे क्लास के बराबर आ जाते हैं और उनको वो सब्जेक्ट अच्छा लगने लगता है, समझ में आने लगता है तो फिर वह स्कूल जाने के लिए मोटिवेट होंगे।

बच्चों से बहुत ज्यादा एक्सपेक्टेशन मत रखिये :

कभी-कभी हम लोग छोटे बच्चों से कुछ एक्सपेक्टेशन करने लगते हैं कि तुम स्कूल जाओगे, फिर तुम बड़े हो के ऐसे बनोगे etc etc . उसको धीरे-धीरे पढ़ाई एक बोझ जैसी फील होने लगती है। उसको लगता है, कि यह मुझे बनना है और अगर मैं नहीं बन पाया तो क्या होगा। बल्कि पेरेंट्स कई बार ऐसे कहने लगते है कि तुम ऐसा बनोगे या तुम इतने परसेंट मार्क्स लाओगे तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। मैं प्राउड फील करूंगी या करूंगा। तो इन सब चीजों से बच्चों पर एक प्रेशर पड़ता है। अगर वो उसको इजली अचीव कर सकते हैं तब तो ठीक है, अदर वाइज उनको यह लगता है कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया तो पेरेंट्स मुझसे नाराज भी होंगे और दुखी भी हो जाएंगे।

बच्चों के साथ समय बिताएं :

ऐसे में बच्चे बहुत प्रेशर फील करते हैं और इन जनरल उनका पढ़ाई से मन हट जाता है और स्कूल जाने का कोई उनका मोटिवेशन नहीं रहता है। कई बार पेरेंट्स पढ़ाई को लेकर इतने बीजी हो जाते हैं कि वह बच्चों की खेलने के लिए भी टाइम नहीं देते।

बच्चों को खेलने के लिए मना ना करें :

बच्चे अगर खेलने जाना चाहते हैं और पढ़ाई रह गई है, होमवर्क रह गया है या एग्जाम आने वाला है तो वह मना कर देते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए खेलने से पढ़ाई का नुकसान नहीं होता है बल्कि पढ़ाई ना करने से पढ़ाई का नुकसान होता है। खेलने से उनके अंदर गुड हार्मोस आते हैं और वह मोटिवेटेड रहते हैं। खेलने के लिए कभी भी मत रोकिए बस टाइम फिक्स कर दीजिए। ऐसा नहीं कि अनलिमिटेड टाइम के लिए वो खेले लेकिन पढ़ाई की वजह से खेलना रोकना बिल्कुल ठीक नहीं है।

उन्हें उनकी पसंद का टिफ़िन दें :

अगर बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं या उनका मन नहीं हो रहा है तो उनको मोटिवेट करने के लिए आप उनको अच्छी चीजें खिला सकते हैं, उनको टिफिन में अच्छी चीजें बनाकर दे सकते हैं।

स्कूल के बारे में अच्छी बातें बताएं :

उनको स्कूल के बारे में कुछ अच्छी बातें बताइए, वहां के फायदे बताइए और लोग जो स्कूल गए और उससे उन्होंने क्या अचीव किया उनकी लाइफ कितनी अच्छी है इस तरह की स्टोरीज जो कि वो बच्चे रिलेट कर पाए, ऐसी भी चीजें बताइए ताकि वह स्कूल को अच्छी जगह माने। उनको लगे कि यहां जाकर मेरे साथ अच्छा होगा।

बच्चों को स्ट्रेस न होने दे :

कभी-कभी पेरेंट्स अपने बच्चों से हाई एक्सपेक्टशंस रखते हैं। बच्चे जितना कर सकते हैं उससे ज्यादा एक्सपेक्टेशन रखने से वह प्रेशर फील करते है और यह चीज हर एक के ऊपर एप्लीकेबल है। हर एक की स्किल्स और पोटेंशियल लिमिटेड होते हैं। अगर आप उससे ज्यादा की एक्सपेक्टेशन रखेंगे तो परफॉर्मेंस भी खराब होगा और साथ में प्रेशर और स्ट्रेस भी होगा।

बच्चों को फ्रीडम दीजिये, उन्हें बांधिए नहीं :

बच्चों को थोड़ी सी फ्रीडम दीजिए। वो जो करना चाह रहे हैं उनको करने दीजिए। हर समय उनको मैनेज मत करिए, मॉनिटर मत करिए, थोड़ी सी फ्रीडम देंगे तो देखेंगे कि बच्चे ज्यादा खुश होंगे और उन्हें स्कूल जाने में भी कोई दिक्कत नहीं होगी। कभी कभी पेरेंट्स का ज्यादा इंटरफेरेंस होता है या उनकी कुछ हाई एक्सपेक्टशंस होती है या कुछ अपने एस्पिरेशंस होते हैं तो वह कहीं ना कहीं बच्चों के ऊपर आ ही जाते हैं, तो उससे थोड़ा सा पेरेंट्स बच्चों को फ्री कर दीजिए।

बच्चों में स्कूल जाने का डर और स्कूल के बारें में myths ख़तम करें :

पेरेंट्स अगर आपको बच्चों को खुशी-खुशी स्कूल भेजना है तो उन्हें यह बताइये की स्कूल एक अच्छी जगह है जहां पर कोई प्रेशर नहीं है। उनको खेलने को भी मिलेगा। उनको अच्छी चीजें मिलेंगी। अच्छा खाने को मिलेगा, साथ-साथ आप उनके ऊपर किसी भी तरह का पढ़ाई का प्रेशर मत डालिए। जितनी एक्सपेक्टेशन वो पूरी कर सकते हैं, बस उतनी ही एक्सपेक्टेशन रखिए और बाकी उनको मोटिवेट करते रहिए तो ऐसा करेंगे तो बच्चे हमेशा खुशी खुशी स्कूल जाएंगे।
इस ब्लॉग में इतना ही मिलते हैं नेक्स्ट ब्लॉग में किसी नए टॉपिक के साथ।

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Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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