Ajita chapter 16 – बिन बुलाये मेहमान / unwelcome guests

A friend is consoling another friend

Synopsis

“दो महीने बाद मेरे बड़े बेटे की शादी है और हमारे घर में इतनी जगह नहीं है।

Ajita Chapter-16 बिन बुलाये मेहमान / unwelcome guests

होली खत्म हो गई थी और परीक्षा शुरू होने को सिर्फ कुछ ही दिन बाकी थे।

दुर्भाग्यवश अजिता की सास और विजय दोनों बीमार पड़ गए।

विजय को मलेरिया और जया को हैजा हो गया।

दोनों काफी कमज़ोर हो गए थे इसलिए डॉक्टर ने विजय और जया दोनों को आराम करने की और अपना ध्यान रखने की सलाह दी।

“तुम बहुत थक गई होगी अजिता, जाओ थोड़ी देर जाकर आराम करो।”

पिछले कुछ दिनों से अजिता को आराम का समय ही नहीं मिल पाया था और उसके ऊपर काम का बोझ बहुत बढ़ गया था।

विजय ने दबी आवाज़ मे कहा,

“तुम्हें सारा दिन काम करना पड़ रहा है जबकि तुम्हें परीक्षा की तैयारी भी करनी है।”

“ऐसी कोई बात नहीं है।” अजिता ने कहते हुए विजय को दूध का गिलास दिया और अपनी सास को चाय बिस्कुट।

“आप बुरा मत महसूस करिये और मेरे लिए चिंता भी मत करिये, मैं ठीक हूँ और बीमारी के लिए आप खुद ज़िम्मेदार नहीं है, कोई कभी भी बीमार पड़ सकता है।”

“तुम्हारी बात सही है लेकिन मुझे बुरा लगेगा अगर तुम्हारे अच्छे अंक नहीं आए क्योंकि, तुमने पूरे साल तैयारी की है और अभी परीक्षा के समय तुम्हें इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है।”

“मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता अगर मेरे कम अंक आए तो, मैं यह परीक्षा सिर्फ पास हो के डिग्री पाने के लिए दे रही हूँ और वैसे भी मेरी तैयारी हो चुकी है।” अजिता विजय की चिंता को कम करना चाह रही थी।

तभी दरवाज़े की घंटी बजी। मकान मालिक बनर्जी मिलने आये हैं।

विजय ने उठकर उनका स्वागत किया और अजिता उनके लिए चाय लेने के लिए रसोई की तरफ चली गई।

“आप कैसे हैं विजय जी? मेरी पत्नी कल बता रही थी कि आपकी माताजी और आप दोनों ही अस्वस्थ हैं।”

“अभी ठीक हूँ मैं पर मेरी माताजी ठीक नहीं हैं,” कमजोरी के कारण धीमी आवाज़ में विजय ने कहा।

बीमारी के दौरान मेहमानों का आना कभी कभी सच में समस्याग्रस्त हो जाता है।

जो भी उनकी अस्वस्थता के बारे में सुनता था वह उनका हाल-चाल पूछने आ जाता था और फिर अजिता के लिए उन मेहमानों की आवभगत का काम भी जुड़ जाता है।

अजिता को इस समय उन लोगों की ज़रूरत थी जो उसकी मदद कर सके।

वो अजय को याद कर रही थी जो उस समय किसी यात्रा पर बाहर गया था।

अजिता ने चाय और बिस्कुट ट्रे पर रखा और बैठक कक्ष में आ गई जहाँ श्री बनर्जी कह रहे थे,

“दो महीने बाद मेरे बड़े बेटे की शादी है और हमारे घर में इतनी जगह नहीं है।

सब एक साथ रह सकें इसलिए मुझे बेटे के लिए इस हिस्से की जरूरत है।

मुझे ये कहते हुए बहुत बुरा लग रहा है लेकिन मैंने सोचा कि आपको पहले ही बता देना अच्छा रहेगा।

आपको अपने लिए दूसरा मकान ढूँढने के लिए थोड़ा समय मिल जाए।”

To be Continued..

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Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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