यह भी एक तरीका गांधी जी को श्रद्धांजलि देने का

Softies posing gandhi ji's teaching bura na dekho bura na bolo bura na suno

Synopsis

अब इसकी तुम्हें जो भी सजा देनी हूं वह तुम दे सकते हो।

गांधी जयंती – गांधी जी को श्रद्धांजलि

बगल के कमरे से कुणाल और उसके पापा के बीच चल रही बातों से ज्योत्सना का मन ग्लानि से भरा जा रहा था। विशाल बेटे को समझा रहा था,

‘ सच बोलना ही गांधी जी की सबसे बड़ी ताकत थी। वह देखने में आम इंसान थे लेकिन अपनी सच्चाई की ताकत से वह सबसे अलग थे। गलती करना उतना गलत नहीं है जितना उसे कबूल नहीं करना गलत है । लेकिन उसे कबूल करने के लिए हिम्मत चाहिए। उसे कबूल कर सच बोलने के लिए जो हिम्मत चाहिए वह बहुत कम लोगों में होती है। अगर यह शक्ति किसी में है तो वह अपनी जिंदगी की सारी लड़ाइयां जीत लेता है।’

‘गांधी जी की तरह?’ कुणाल ने पूछा

‘हां गांधी की तरह,’ विशाल हंसते हुए बोला।

ज्योत्सना ने ठान लिया कि वह आज विशाल को सब कुछ सच-सच बता देगी फिर जो होगा देखा जाएगा।

विशाल पिछले साल अलमारी से जो ₹50000 चोरी हुए थे वह घर में चल रहे कंस्ट्रक्शन के किसी कर्मचारी ने नहीं बल्कि मैंने ही लिए थे। मैंने उसे बहन को दिए थे पिताजी की सर्जरी के लिए। उस समय मैंके में पैसे कम पड़ गए थे और अगर समय पर सर्जरी ना होती तो पिताजी का बचना मुश्किल होता। उस समय मैं तुमसे कुछ कह ना पाई और यह कदम उठा लिया। अब इसकी तुम्हें जो भी सजा देनी हूं वह तुम दे सकते हो।

विशाल यह सुनकर सन्न रह गया और कुछ सोचने सोचने लगा, फिर कुछ देर बाद ज्ज्योत्सना का हाथ पकड़ कर बोला,

‘ मुझे माफ कर दो। मुझे नहीं मालूम था कि मैं इतनी छोटी सोच का हूं। तुम्हारे पिताजी की सर्जरी के लिए उस समय पैसे की जरूरत थी यह बात मुझे मालूम थी लेकिन पैसे होते हुए भी मैंने खुद देने की बात नहीं कही ।अगर उस समय तुम्हारे पिताजी की जगह मेरे पापा का के साथ ऐसा होता तो मैं बिना कुछ सोचे ही उनकी सहायता करता और मुझे मालूम है कि तुम भी ऐसा ही सोचती।

मैंने ही तुम्हारी भावना का ध्यान नहीं रखा। मैंने ही अपने और तुम में अंतर कर दिया। अगर मैं वैसे भावना ना रखता तो तुम्हें मुझसे छुपा कर  यह न करना पड़ता।

विशाल और ज्योत्सना दोनों की आंखों में सच्चाई के आंसू बह रहे थे मन में जो बोझ था वह उतर गया था।

उस दिन गांधी जयंती थी, गांधी जयंती के अवसर पर विशाल और ज्योत्सना की वह सच्ची श्रद्धांजलि थी।

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Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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