Teenagers की Psychology समझना
चाइल्डहुड से एडल्टहुड तक आने तक के बीच की स्टेज Teenage होती है। इस स्टेज में हार्मोनल चेंजेज होते हैं और जिसके कारण हम देखते हैं कि Teenagers के बिहेवियर में और फिजिकल डेवलपमेंट में काफी चेंजेज आते हैं। Teenagers अपने इन चेंजेज के लिए बहुत रेडी नहीं होते हैं और वह समझ भी नहीं पाते हैं कि क्या हो रहा है। उसके कारण इस स्टेज में उनके अंदर Psychological प्रॉब्लम्स भी होती हैं ।
पेरेंट्स के लिए भी teenagers की Psychology समझना बहुत जरूरी है ताकि उनसे अच्छी तरह से डील कर सके और इस स्टेज को वह सक्सेसफुल लीड कर सके।
इस ब्लॉग में हम लोग जानेंगे कि Teenagers की Psychology क्या होती है। वह क्यों इस तरह से बिहेव करते हैं, जो पेरेंट्स के लिए उनसे डील करना कई बार बहुत चैलेंजिंग होता है। और Teenagers को भी अपनी Psychology समझना चाहिए कि उनके साथ क्या-क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है।
Teenagers खुद को mature मानने लगते है :
इस स्टेज में Teenagers अपने आप को बहुत मैच्योर मानने लगते हैं और हो भी जाते हैं लेकिन पूरी तरीके से नहीं। उनके मन में यह फीलिंग रहती है कि अब तो हम समझदार हो गए। उनके अंदर रीजनिंग की पावर बढ़ जाती है और वह कुछ एब्स्ट्रेक्ट चीजों को भी सोच पाते हैं। इस वजह से उनको लगता है कि वह मैच्योर हो गए और अपने डिसीजंस खुद ले सकते हैं।
हार्मोनल चैंजेस के कारण डिप्रेशन और नकारात्मकता होना :
इस स्टेज में मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर्स की संभावना बहुत ज्यादा होती है। ऐसे चेंजेज आने पर बच्चों के अंदर कई तरह के प्रेशर्स होते हैं जैसे कि उनको अपनी आइडेंटिटी को लेकर प्रेशर होता है कि मैं क्या बनूंगा, कैसे बनूंगा। इसके अलावा उनको एजुकेशन को लेकर प्रेशर होता है, पियर प्रेशर होता है। कभी कभी चाइल्डहुड में ऐसा ट्रामा हो जाता है कि वह उन बातों को लेकर बहुत ज्यादा सेंसिटिव हो जाते हैं। कई तरह के इश्यूज को लेकर उनके मन में एक नेगेटिव फीलिंग आती है, एंजाइटी हो जाती है और वह कई बार डिप्रेशन में कन्वर्ट हो जाती है। इसलिए पेरेंट्स को उनके साथ डील करते समय बिल्कुल जजमेंटल नहीं होना चाहिए और बहुत एंपैथी के साथ बिहेव करना चाहिए।
हेल्थ नज़रअंदाज़ हो जाती है:
बच्चों में इस स्टेज में रिस्क टेकिंग बिहेवियर भी बहुत कुछ देखा जाता है और इसकी वजह से वह अपनी हेल्थ का भी ध्यान नहीं रखते हैं। और कई बार सब्सटेंस यूज को भी शुरू कर देते हैं। पेरेंट्स को इसके लिए बहुत ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को यह एजुकेशन टाइम टू टाइम देते रहें कि इस तरह की चीजें उनको कैसे नुकसान कर सकती हैं।
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पर्सनल स्पेस :
इस स्टेज में बच्चों का मन होता है कि वह पेरेंट्स से थोड़ा सा अपने को डिस्टेंस कर लें। उनको हर चीज में पेरेंट्स का टोकना या पूछना पसंद नहीं होता है। क्योंकि इस स्टेज में बच्चे अपनी इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी बनाने के लिए बहुत ज्यादा इंस्पायर्ड रहते हैं। उनको लगता है कि वह जो करना चाह रहे हैं उसमे पेरेंट्स का इंटरफेरेंसनहीं होना चाहिए । उसी तरह से अपने पीअर्स के साथ जो उनकी रिलेशनशिप बनती हैं, उनमें भी उनको पेरेंट्स का इंटरफेरेंस अच्छा नहीं लगता। पेरेंट्स को भी चाहिए कि उनके फ्रेंड्स को वेलकम करें, उनके आइडियाज को सुनें और समझने की कोशिश करें।
पर्सनल लुक्स और इमेज :
इस स्टेज में बच्चे अपनी सेल्फ इमेज को लेके बहुत कॉन्शियस होते हैं और खास करके Teenage गर्ल्स। उनको अपनी इमेज , अपीयरेंस को लेकर बहुत टेंशन रहता है। वह किसी ना किसी को रोल मॉडल मानती हैं और फिर उससे कहीं ना कहीं कंपैरिजन भी करती है। सोशल मीडिया भी बहुत बड़ा रोल प्ले करता है और इस तरह के कंपैरिजन उनके ऊपर बहुत नेगेटिव असर डालते हैं ।
ऐसी स्टेज में पेरेंट्स को चाहिए कि गर्ल्स को इस तरह से समझाएं कि जो एक्सटर्नल ब्यूटी है उससे ज्यादा वह अपने स्किल्स पर ध्यान दें और एक्सटर्नल ब्यूटी को भी एनहांस करने की कोशिश करें।
रिलेशनशिप :
इस स्टेज में टीनएज अपने पियर ग्रुप के रिलेशनशिप्स को लेकर बहुत ज्यादा सीरियस होते हैं और कई बार ऐसा होता है कि अगर यह रिलेशनशिप किसी वजह से अच्छा नहीं बन पाती है तो उन बच्चों को इतनी एंजाइटी होती है कि उनकी सेल्फ एस्टीम लो हो जाती है और डिप्रेशन भी हो जाता है।
हार्मोनल चैंजेस और पेरेंट्स का गाइडेंस :
यह रिसर्च में देखा गया है कि खास करके Teenage गर्ल्स को इस तरह की गाइडेंस की जरूरत होती है कि वह किस तरह से रिलेशनशिप बना सकती हैं। Teenage Psychology में बहुत इंपॉर्टेंट और सबसे ज्यादा कॉमन जो पॉइंट है वो यह कि Teenage में बच्चे पेरेंट्स का सपोर्ट चाहते हैं। वह चाहते हैं कि वह अपनी बात को पेरेंट्स को बता सकें और पेरेंट्स उनको बिना जज किए सुन लें।
यह चीज बच्चों के अंदर बहुत ज्यादा होती है और कई बार बच्चे अपने मन की बातें पूरी तरह से पेरेंट्स को बता नहीं पाते हैं क्योंकि उनको मालूम है कि पेरेंट्स इसमें उनको जज करेंगे, डांटेंगे या ब्लेम करेंगे।
पेरेंट्स के लिए टिप्स :
मेरी सभी पेरेंट्स से यह एडवाइस होगी कि teenagers के साथ आप बिना किसी जजमेंट के बिहेव करना सीखें क्योंकि कई बार गलती पेरेंट्स की ज्यादा होती है, teenagers की नहीं। अपने बच्चों को आप समझने की कोशिश करिए, किसी तरह का कोई जजमेंट ना रखिए, वह जैसे हैं उनको वैसा ही एक्सेप्ट करिए। आपका रोल एक गाइड की तरह होना चाहिए कि बच्चे कहीं गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं, पर यह समय है उनको उड़ने देने का, एक्सप्लोर करने देने का, अपने आप को समझने का।
इसमें आपके गाइडेंस की इंपॉर्टेंस बहुत है लेकिन आप गाइडेंस तभी दे पाएंगे जब आपकी रिलेशनशिप बच्चों के साथ बहुत अच्छी होगी। बच्चे आपकी बात सुनना चाहते हैं, वह अपनी बात कहना चाहते हैं, तो आप उनसे एंपैथी के साथ और बिना जजमेंट के पेश आइए।
FAQs
१. मैं अपने teenage बच्चों के साथ communication को कैसे सुधार सकता हूँ, जो मुझसे बात करने में असहज लगता है?
उत्तर :अपने teenage बच्चे के साथ संचार को सुधारने में संवेदनशीलता, active listening, and conclusive environment बनाने की आवश्यकता होती है।
होर्मोनेस को कण्ट्रोल करने के लिए यहाँ कुछ सुझाव हैं:
एक्टिव लिसनिंग : अपने teenage की कही बातों में दिलचस्पी दिखाएं। बिना इंटरप्ट किए या तुरंत सलूशन दिए , सुनें। यह उन्हें महसूस कराता है कि उन्हें सुना गया और उनकी भी वैल्यू है।
Conclusive approach: अत्यधिक क्रिटिसाइज़ या जजमेंटल न होने का प्रयास करें। यदि वे अपने विचारों और कार्यों के लिए ruthlessness फील , तो वे खुलेंगे और वो डरेंगे भी नहीं।
Quality time: उनके साथ उनकी मनपसंद एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करके उनके साथ एक समय बिताएं । यह एक मजबूत रिलेशनशिप बनाने और उन्हें उनकी भावनाओं को शेयर करने में उन्हें कम्फर्टेबले करेगा।
Open-ended questions: चर्चा को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करें बजाय न की हां/नहीं के उत्तरों के। उदाहरण के लिए, “तुम्हारा दिन कैसा रहा?” या “आज स्कूल में क्या रोचक लगा?”
२. यदि teenage में डिप्रेशन या चिंता के लक्षण दिखा रहा है, तो मैं क्या करूं?
उत्तर यदि आपके बच्चे में डिप्रेशन या चिंता के लक्षण दिख रहे है, तो इसे सावधानीपूर्वक डील करें और किसी प्रोफेशनल से मदद लेना बहुत जरूरी है। यहाँ आप क्या कर सकते हैं:
लक्षणों को पहचानें : डिप्रेशन और चिंता के सामान्य लक्षण में नींद के पैटर्न में परिवर्तन, गतिविधियों में रुचि का न होना, सामाजिक बातचीत में इंटरेस्ट न लेना, गुस्सा और खाने में बदलाव शामिल होते हैं।
Open communication: अपने बच्चे से अपनी चिंताओं के बारे में खुलकर बातचीत करें। प्रोफेशनल से मदद लें। अगर जरूरत है तो अपने teenage को मेन्टल हेल्थ प्रोफेशनल के पास ले जाएं। एक पेशेवर स्वास्थ्य विशेषज्ञ या प्राथमिक देखभाल डॉक्टर उन्हें सही दिशा में ले जाने में मदद कर सकते हैं।
Communicate:अपने बच्चे को सपोर्ट और एम्पथी के साथ सुने। ऐसा माहौल बनाये ताकि वो अपनी फीलिंग्स को आपसे आसानी से शेयर कर सके और खुस को सिक्योर फील करें।
३.Teenager अगर फ्रीडम की बात करें तो उसके साथ किस तरह से सही कम्युनिकेशन स्थापित करें ?
उत्तर: जब आपका बच्चा अपनी फ़रीदों की बाटर करता है तो यह एक अवसर है जब आप उसके साथ सही तरीके से कम्यूनिकेट कर सकते है :
Build a rapport: कम्युनिकेशन के दौरान उन्हें महसूस होना चाहिए कि आप उनके विचारों और भावनाओं का समर्थन करते हैं, भले ही आपका विचार उनके साथ सहमत न हो।
Set boundaries: फ्रीडम की बात करते समय उन्हें यह बात साफ़ कर दे कि उनकी लिमिटेशन क्या होगी और उन्हें यह भी समझाएं कि फ्रीडम को use करने का सही समय क्या है।
समर्थन और मार्गदर्शन: उनके साथ फ़रीदों के बारे में बात करते समय उनके decisions के बारे में उन्हें गाइड करें, और जरूरी हो तो उन्हें सपोर्ट भी करें।
यदि आपके पास ज्यादा doubts हैं या आपको ज्यादा चिंता है, तो कृपया एक हेल्थ प्रोफेशनल की सलाह लें। वे आपको और आपके परिवार को ठीक से गाइड कर सकते हैं।
Suggested Readings:
निष्कर्ष :
अंत में, teenager’s psychology को समझना माता-पिता के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि teenagers के लिए। टीनएज एक महत्वपूर्ण अवधि है जिसमें बच्चे physically, emotionally and social changes को एक्सपीरियंस करते है, जो कई बार चुनौतियों और pressures के साथ आता है। माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे अपने teenagers के साथ openly communicate करते रहे, समर्थन प्रदान करें, और जब आवश्यक हो, तो प्रोफेशनल की सहायता लें जो कि एक compassionate and supportive environment को बननए रखने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, फ्रीडम की जरूरत को समझते हुए उन्हें गाइड करें और उचित सीमाओं को स्थापित करना भी जरूरी है। यह स्वस्थ संबंधों को बढ़ावा देने और सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य परिणामों को प्रोत्साहित करनेकी कुंजी है। अंत में, मिलकर काम करते हुए और समझदारी बनाए रखकर, तथा अपने teenagers को प्रोफेशनल गाइडेंस दे करके, माता-पिता और teenagers दोनों ही teenage period के परिणामों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
