एक financially literate women देश के economic growth में कैसे मदद कर सकती है ? 

Financially Literate औरत घर के साथ साथ देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देती है।

Synopsis

पिछले कुछ समय से भारत में महिलाओं की  economic growth  में और  development में तेजी से सुधार देखा गया हैं। आज के विकसित भारत में महिलाओं का financial literate होना हमारे देश को निरंतर विकास की ओर ले जा रहा है और सच में यह एक मौका है जब हम सही मायने में International Women’s Day को celebrate कर सकते है। जब महिलायें Financial literate होंगी तो उन्हें finance से  जुडी समस्याओं से निपटने और उनका हल ढूंढ़ने में काफी मदद मिलेगी। आजकल के इस दौर में Financial literacy एक बहुत जरूरी component  है जिसके द्वारा आप अपने भविष्य को भी secure कर सकती है।

भारतीय महिलाओं के लिए, financial independence महज़ आकांक्षा नहीं है बल्कि उससे कहीं ज्यादा मायने रखती हैं।  यह empowerment and self-sufficiency की दिशा में पहला कदम है। जैसे-जैसे वे करियर में उन्नति और income को  बढ़ाने के लिए प्रयास करती  हैं, वैसे वैसे उनके लिए खुद के finance के प्रति priority  बढ़ जाती है। financial success का यह सफर यक़ीनन व्यक्तिगत है पर हर कोई इस दिशा में empowered होने के लिए यथासंभव प्रयास करता है और खुद का रास्ता स्वयं चुनता है।

Financial security की तलाश में, महिलाएं अक्सर अपने और अपने परिवार को stability देने के लिए  fixed deposits और सोने जैसे traditional investment के तरीकों को ही अपनाती हैं। हालांकि ये tools secured होते है पर long run में वो आपको क्या return देंगे  क्या उनकी  limitations हैं , इसे जानना भी बहुत जरूरी है। इसमें कोई दो राय नहीं की stability और secured होने के बावजूद, वे inflation से आगे नहीं निकल सकते हैं, परिणामस्वरूप समय के साथ उनकी value बढ़ने में काफी दिक्कतें आती है। 

इन सब बातों को सोंचते हुए महिलाओं का financial literate होने  की जरूरत और बढ़ जाती हैं। महिंलाओं में जरूरी knowledge और skills  के होने से न केवल वह अपने लिए महतवपूर्ण financial decisions ले सकती है बल्कि समाज और देश में भी actively contribute कर सकती है। यह आर्टिकल  भारतीय महिलाओं के लिए financial literacy के महत्व और उन तरीकों के बारे में बताता हैं  जिनसे यह उनके empowerment के लिए काम कर सकता है।

Financially literate महिलाएं अलग अलग तरीकों से देश की economic growth में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। जैसे :

Productivity को बढ़ाने में :

Financial literacy महिलाओं को अपने खुद के फाइनेंस के साथ साथ बिज़नेस इन्वेस्टमेंट को अच्छे से से मैनेज कर सकती है। बेहतर तरीके से जब महिलाओं को महिलायें फाइनेंस मैनेजमेंट स्किल्स के साथ काम में अपनी प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के साथ साथ इकनोमिक ग्रोथ में भजि अपना योगदान दे सकती है। 

Entrepreneurship और नए विचार:

Financially literate महिलायें entrepreneurship एक्टिविटीज में ज्यादा इन्वॉल्व रहती है। और इस स्किल की मदद से वो अपना कामबेहतर तरीके से शुरू करती है और साथ में इसके द्वारा और लोगों को भी रोज़गार देती है, नए विचारों  अपने व्यवसायों को प्रभावी ढंग से  न केवल शुरू और प्रबंधित करती है बल्कि दूसरों को भी रोज़गार के अवसर प्रदान कराती है साथ ही अपने नए नए विचारों से देश के आर्थिक विकास में भी योगदान देती है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश:

Financially literate  महिलाएं अपने और अपने परिवार के लिए एजुकेशन और अच्छे स्वास्थ्य का क्या महत्व होता है , यह सब इनको अच्छे से पता होता है।  वे इन महतवपूर्ण पहलुओं के लिए resources पहले से ही allocate करके रखते है और अच्छे से इन जिम्मेदारियों को निभाती भी है जी की ultimately economic growth को बढ़ाने में मदद करती है। 

बचत और Investments:

Financially literate महिलाएं अपनी कमाई को समझदारी से बचाने और इन्वेस्ट 

में पूरी तरह से सक्षम होती हैं। बचत करके और सोच-समझकर निवेश करके, वे economy में पूंजी निर्माण में योगदान करती हैं, जो economic growth और  विकास को बढ़ावा देता है।

भावी पीढ़ियों का empowerment:

Financially literate  महिलाएं अपने बच्चों और भावी पीढ़ियों के लिए ideal के रूप में काम करती हैं। अपने परिवारों को financial knowledge से लैस करके उनको economy में अपना योगदान देने और देश को विकसित करने में मदद करने के लिए तैयार करती है। 

सामुदायिक विकास:

Financially literate महिलाएं अक्सर सामुदायिक विकास  में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। स्वयंसेवा, परोपकार या लीडरशिप  की भूमिकाओं के माध्यम से, वे inclusive growth को बढ़ावा देती है और अपने समुदायों के सामाजिक और इकनोमिक विकास में मदद करती हैं।

Policy Advocacy:

Financially literate महिलाएं उन नीतियों की वकालत कर सकती हैं जो gender की समानता, financial inclusion, and economic empowerment को बढ़ावा देती हैं। जागरूकता बढ़ाने और policy decisions को प्रभावित करके, वे महिलाओं के लिए अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से भाग लेने और इसके विकास में योगदान करने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने में योगदान करते हैं।

कुल मिलाकर, Financially literate महिलाओं का सशक्तिकरण न केवल उनकी व्यक्तिगत समृद्धि के लिए बल्कि राष्ट्रों के सतत आर्थिक विकास और विकास के लिए भी आवश्यक है। हर तरह से स्वतंत्र रहें, किसी एक दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने के बजाय हर दिन मनाएं।

महिलाओं के finances को बढ़ावा देने में मदद करने वाली आदतें क्या हैं-

सात आदतें  जो फायदेमंद साबित हुई हैं:

1: Uncertainties से सुरक्षा

एक unpredictable दुनिया में, अनजाने खर्चों से बचने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच पाने लिए बनाना ही होगा। कम से कम छह से बारह महीने के लिए खर्चों को कवर करने  emergency फंड्स की व्यवस्था करनी होगी जो कि  financial turbulence के समय में भी वो बचत बरकरार रहे।

2: निवेश करने से पहले खुद को educate करें

किसी में भी निवेश करने से पहले, उसकी complexity को पूरी तरह से समझना जरूरी है। Transparency को प्राथमिकता दें और ऐसेी कंपनियों से बचें  जो की क्लियर न हो। मार्केट को अच्छे से नेविगेट करने के लिए किसी अच्छे Financial advisors से सलाह ले। इस बात को ध्यान में रखे कि आपका निवेश आपके financial goals और जोखिम सहनशीलता के साथ संरेखित हो।

3: positive money mindset विकसित करें

पैसे के प्रति negative attitude आपकी फाइनेंसियल सफलता में बाधा बन सकता है। Financial  आकांक्षाओं को लालच या frugality को कंजूसी के साथ जोड़ना गलत है, अब इन myths की सोच से आगे सोंचना होगा। अपने financial decisions को अपने जीवन के लक्ष्यों और आकांक्षाओं के साथ जोड़ते हुए, पैसे के प्रति सकारात्मक मानसिकता विकसित करें।

4: संपत्ति स्वामित्व लचीलेपन को अपनाएं

धन को केवल संपत्ति या ऑटोमोबाइल जैसी अचल संपत्तियों तक सीमित रखने वाली पारंपरिक धारणाओं पर पूर्ण विराम लगाएं। किराए पर लेने या strategic property investments जैसे विकल्पों पर विचार करके flexibility को अपनाएं। हर उन अवसरों का लाभ उठायें जो आपकी  वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में आपकी मदद करें। 

5: खराब प्रदर्शन करने वाले निवेश 

पहचानें कि कब निवेश उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है और divest के बारें में निर्णय लें। पहले तो कोशोयश करें की निवेश डूबे नहीं और हर सम्भ प्रयास से रोकने की कोशिश करें। और आगे के नुकसान को रोकने के लिए under performing इंवेस्टमेंट्स को छोड़ दें। और अच्छी  opportunities को हासिल करने के लिए poor performing निवेशों को मुक्त करें।

6: Diversify Income Sources

कई revenue streams स्थापित करके long-term financial stability को मजबूत करें। म्यूचुअल फंड और किराये की संपत्तियों जैसे विभिन्न निवेश माध्यमों से passive income  को शामिल करने के लिए आय स्रोतों में diversification करें।  यह रणनीति जोखिमों को कम करने में मदद करती है और समग्र वित्तीय लचीलापन बढ़ाती है।

7: परोपकार के लिए प्रतिबद्ध रहें

एक बार वित्तीय सुरक्षा हासिल हो जाने पर, सालाना आय का एक हिस्सा धर्मार्थ प्रयासों के लिए आवंटित करें। चाहे monetary  योगदान के माध्यम से या सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से, सहानुभूति को बढ़ावा देने और सामाजिक कल्याण में योगदान देने को प्राथमिकता दें।

Suggested Readings:

रिटायरमेंट के बाद #1

हमारी खुशियां परिस्थितियों की स्वीकृति में है।

रिटायरमेंट के बाद #2

8: एक मजबूत Retirement पोर्टफोलियो का निर्माण

एक मजबूत Retirement पोर्टफोलियो बनाने के लिए जल्दी शुरुआत करें और सोच-समझकर निवेश विकल्प चुनें। बदलते वित्तीय लक्ष्यों और बाजार स्थितियों के अनुरूप पोर्टफोलियो की लगातार समीक्षा और समायोजन करें। यह सक्रिय दृष्टिकोण सेवानिवृत्ति के दौरान दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और मानसिक शांति सुनिश्चित करता है।

इन प्रथाओं को अपनाकर, आप अपनी आकांक्षाओं और मूल्यों के अनुरूप एक लचीली वित्तीय नींव तैयार कर सकते हैं। आइए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाएँ!!

अस्वीकरण:

ऊपर व्यक्त विचार और सिफारिशें व्यक्तिगत विश्लेषकों के हैं और जरूरी नहीं कि ये Parentingbbyanshu.com की राय या विचारों को प्रतिबिंबित करें। हम निवेशकों को कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले प्रमाणित विशेषज्ञों या वित्तीय सलाहकारों से परामर्श करने की दृढ़ता से सलाह देते हैं।

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Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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