बच्चे जब शरारत या जिद करते हैं या कोई गलत काम करते हैं और बच्चों के नखरे से पेरेंट्स को गुस्सा आ जाता है और उस गुस्से में वो बच्चों को मारते हैं या बहुत जोर से डांटते हैं। कभी-कभी वह घर के बाहर भी, पब्लिक प्लेसेस में भी ऐसा करते दिखाई पड़ते हैं।
मारने के साइड इफेक्ट्स :
अकॉर्डिंग टू रिसर्च, साइंटिस्ट ने बताया कि बच्चों को इस तरह से मारना बच्चों की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डालता है। मेंटल डेवलपमेंट में इसका नेगेटिव इंपैक्ट ऐसा भी होता है कि बच्चे कई बार बहुत स्ट्रेसफुल रहते हैं और उनका यह स्ट्रेस धीरे-धीरे बढ कि कई बार डिप्रेशन में कन्वर्ट हो जाता है। ऐसे बच्चों में कोई चीज डिसाइड करने की जो कैपेबिलिटी है वह भी नहीं डेवलप हो पाती है। इसी तरह से बच्चों को मारने से बच्चों का और पेरेंट्स के बीच का जो ट्रस्ट रिलेशन बनना चाहिए वह भी नहीं बन पाता है।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि पेरेंट्स बिना मारे बच्चों को कैसे डिसिप्लिन में रख सकते हैं l बच्चों के नखरों से कैसे एफ्फेक्टिवेली डील कर सकते है।।
अक्सर देखा जाता है कि बच्चों को जो पेरेंट्स मारते हैं, उन पेरेंट्स को अपने गुस्से पर कंट्रोल नहीं होता l और उनको बच्चों की शरारत, बच्चों के नखरे देखकर या कोई भी गलत काम देख के इतना गुस्सा आता है कि वह उनको मार देते हैं बिना यह समझे कि बच्चों के ऊपर मार का क्या असर पड़ेगा। अक्सर ऐसे पेरेंट्स वो होते हैं जिनको खुद भी बचपन में मार पड़ी है और वह सोचते हैं कि मारना ठीक है।
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गुस्से को कण्ट्रोल करें :
ऐसे में पेरेंट्स, आपको क्या करना चाहिए? आपको अपने इमोशंस को कंट्रोल करना आना चाहिए। आप किसी वजह से परेशान हैं और उस परेशानी में जब बच्चे नखरे करते हैं, कोई गलत काम करते हैं या आपसे आर्गू करते हैं तो आपसे इमोशंस कंट्रोल नहीं होते हैं और आप इतना ज्यादा हाइपर हो जाते हैं कि बच्चों को मार देते हैं। उस समय आप यह नहीं सोचते हैं कि बच्चों के ऊपर इसका क्या असर पड़ेगा। आप जो प्रॉब्लम फेस कर रहे हैं उसका सलूशन ढूंढिए और उस पर काम करिए।
अपनी प्रॉब्लम बच्चों के साथ शेयर करिये :
अब अगर ऐसी सिचुएशन है, आप परेशान हैं और बच्चे कोई शैतानी ऐसी कर रहे हैं जो आपको इरिटेट कर रही है तो अपने इमोशंस पर अगर आप कंट्रोल करके उन बच्चों के पास बैठेंगे और अपनी प्रॉब्लम उनसे शेयर करेंगे कि मैं इस समय ऐसा फील कर रहा हूं, मेरे साथ यह प्रॉब्लम है तो आई एम श्योर कि बच्चे इस बात को जरूर समझेंगे और वह अपनी शरारत, अपने गलत काम को जरूर रोकेंगे। बच्चे भी मैच्योर होते हैं और वह इमोशंस को समझते हैं।
बस उनके साथ कैसे कन्वे करना है यह आपको समझना है। आप अगर अपना इरिटेशन दिखा देंगे तो वो नहीं समझेंगे, उनको उससे कोई कनेक्शन नहीं होगा। लेकिन आप अगर अपनी प्रॉब्लम बताएंगे और उस प्रॉब्लम की वजह से आप परेशान हैं यह बताएंगे, वह चीज बच्चे रिलेट कर पाएंगे और समझेंगे।
बच्चों के आइडियाज को भी सुनिए और एक्सेप्ट करिये :
कई बार बहुत सरप्राइजिंग होता है कि जब आप अपनी प्रॉब्लम छोटे बच्चों को बताते हैं तो वह बहुत यूनिक और इनोवेटिव सलूशन भी आपको बताते हैं l क्योंकि उनका वर्ल्ड लिमिटेड है, उनके थॉट्स लिमिटेड हैं और वह हर चीज को राइट एंड रॉन्ग की तरह से देखते हैं। कई बार उनके सॉल्यूशंस ऐसे आते हैं जिसके बारे में हम आप नहीं सोच पाते हैं l इसका फायदा एक और होता है कि आपका बच्चों के साथ कनेक्ट बनता है। बच्चे भी यह समझते हैं कि जब कोई प्रॉब्लम हो तो आपस में बैठ के कंसल्ट करना चाहिए और उससे कोई ना कोई हल भी निकलता है।
अगर बच्चों के बताए हुए टिप्स आपके लिए यूजफुल हैं तो उनको फॉलो भी करिए l और बच्चों को यह चीज आप कन्वे भी करें कि उनके बताए हुए टिप्स से आपको कितना बेनिफिट हुआ। यह आपको दोनों को जोड़ेगा और इसी जगह पर आप अगर मार देते हैं तो वो आपको दोनों को डिस्कनेक्ट करेगा।
कंसर्न को गुस्से में मत बदलिए :
पेरेंट, सबसे पहले आपको अपने इमोशंस को कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। वो न केवल आपके बच्चों के साथ रिलेशन अच्छे बनाएगा बल्कि आपका खुद का स्ट्रेस लेवल कम हो जाएगा। कभी-कभी बच्चे किसी रिस्की चीज को कर रहे हो जिससे वो अनसेफ हो सकते हैं, उस समय आउट ऑफ कंसर्न भी कई बार पेरेंट्स मार देते हैं। जैसे बच्चे अगर कोई ऐसा झूला झूल रहे हैं, उन्होंने बहुत तेज कर दिया और जिससे वह गिर सकते हैं, चोट लग सकती है या रोड पर भागने लगे, तो इस तरह की चीजों को देखकर इतना कंसर्न होता है कि पेरेंट्स बच्चों को मार देते हैं । लेकिन बच्चे को तो पता ही नहीं कि उसको मार क्यों पड़ गई। आप वहां पर भी अपने कंसर्न को कंट्रोल करिए, उसको समझाइए कि यह चीज गलत है, क्या हो सकता था।
सिचुएशन को इफेक्टिवेली हैंडल करिये :
आपको प्लैन करना सीखना होगा। ये एक अल्टरनेटिव टेक्निक है जिससे कि आप किसी भी सिचुएशन को हैंडल कर सकते हैं। बच्चे पढ़ाई नहीं कर रहे हैं, आपने कई बार कहा, वो पढ़ नहीं रहे हैं। अब आपको गुस्सा आ रहा है, आपने जाकर मार दिया, तो क्या इससे बच्चे पढ़ लेंगे? हो सकता है पढ़ने बैठ भी जाएं लेकिन ना उनका मन लगेगा और नेक्स्ट डे फिर क्या होगा? सेम प्रॉब्लम होगी। बच्चे पढ़ क्यों नहीं रहे हैं इसको समझिए और उनको समझाइए कि पढ़ने से क्या फायदा होगा। आप जब बात करेंगे, उनको कन्वेंस करेंगे, उसके रिजल्ट्स बताएंगे तो बच्चे पढ़ने की तरफ अट्रैक्ट होंगे। उनकी आप हेल्प भी करिए, कहीं अगर कोई प्रॉब्लम आ रही है।
अब सपोज करिए कि आपने घर में एक डिसिप्लिन बनाया, आपका टीनेज लड़का है या लड़की है। आपने बोला है कि रात में 9 बजे के बाद उनको घर से बाहर नहीं रहना है। अब वो किसी दिन लेट आया, आपने आते ही आर्गुमेंट शुरू कर दिया, कस के डांटना शुरू किया, उसने कुछ कहा आपको और गुस्सा आ गया और आपने मार दिया या कस के डांट दिया। क्या उससे बच्चा आपसे कनेक्टेड फील करेगा? बिल्कुल नहीं करेगा।
वह कहीं बाहर से आया है, हो सकता है कोई प्रॉब्लम हो, फ्रेंड्स ने जबरदस्ती कर दी हो, कुछ भी इशू हो सकता है या उससे गलती हो गई। उस समय कुछ मत कहिए। नेक्स्ट डे या जब भी आपको टाइम हो, आपको लगे कि इस समय बच्चे से ठीक से बात कर सकते हैं, उस समय उसके साथ बैठिए और उससे वह समझने की कोशिश करिए कि क्यों लेट आया। उससे बात करिए, तो वह भी जानता है कि उससे गलती हुई है, तो वो भी रीजन बताएगा और आगे से ध्यान रखेगा।
अलटरनेट टेक्निक्स अपनाये :
इस तरह की सिचुएशंस में आपको बस अपने आप को कंट्रोल करना है, कुछ अल्टरनेटिव टेक्निक्स अपनानी हैं। जैसे कि बच्चे सपोज सोने नहीं जा रहे हैं, छोटे बच्चे खेल रहे हैं, मस्त हैं, आपको लग रहा है सोने का टाइम हो गया है, सुबह स्कूल भी जाना है, तो आप उनको कह सकते हैं कि चलो, तुमको स्टोरी सुनाते हैं। उनको रूम में ले जाइए, लाइट्स ऑफ कर दीजिए, स्टोरी सुना दीजिए, धीरे-धीरे उनको नींद आ जाएगी, सो जाएंगे। आप हर जगह उनसे नाराज होके या मार के काम कराने की हैबिट को चेंज करिए।
डिसिप्लिन रखने के लिए कुछ रूल्स बनाये और बच्चों से उन्हें फॉलो भी करवाएं :
अब खाना बना है, बच्चे टेबल पर बैठे, उनको एक सब्जी नहीं पसंद आई, वह कह रहा मैं नहीं खाऊंगा। अब आपको गुस्सा आया क्योंकि आपने तो बड़ी मेहनत से बनाया और वो खा नहीं रहा है। अब आप उठे, उसके लिए दूसरी कोई चीज बना के लेकर आए और उसको दे दी। यह मत करिए। घर में अगर कोई डिसिप्लिन है, कोई रूल है, जो चीज सब लोग खा रहे हैं, वो बच्चे को भी खानी चाहिए। अगर उसको पसंद नहीं आ रही है तो उसको ना खाए। वह किसी और तरह से खाए, वो दाल से खा ले, कोई अचार दे दीजिए, उससे खा ले।
आप उसी समय उठ के गए तो आपने तो उसकी आदत डाल दी ना कि यह रूल फॉलो नहीं होगा, जिसको जब जो चीज नहीं पसंद है तो कोई और चीज बन जाएगी। रूल्स को बनाइए, रूल्स को फॉलो कराइए, उसी से आपका स्ट्रेस भी कम होगा, बच्चे डिसिप्लिन भी सीखेंगे। हमेशा उनके मन का या किसी के भी मन की चीजें नहीं होती हैं, उनको एडजस्ट करना भी सीखना आना चाहिए। तो यहां पर आपको गुस्सा नहीं होना है, आपको एक डिसिप्लिन बनाना है।
एक डिसिप्लिन बनाना है, उसको मेंटेन करना है। उसके पास कोई चॉइस नहीं है, अगर वो उसको नहीं खाना है तो नहीं खाए। नेक्स्ट टाइम आप उसकी पसंद की कोई चीज बना दीजिए। उसको यह समझाइए कि कभी किसी की पसंद की चीज बनती है, कभी दूसरे की पसंद की चीज बनती है। लेकिन हम लोग सब मिलके खाते हैं। हम ऐसा नहीं करते कि हमेशा अपने मन की चीज खाएं, दूसरे के लिए भी करना जाता है। देखो, तुम्हारी पसंद की चीज बनी तो हमने भी खाया। इस तरह से समझाने में वो सिचुएशन ही नहीं क्रिएट होती है कि आपको बच्चे को मारना पड़े।
निष्कर्ष :
पेरेंट्स, इस आर्टिकल का क्रक्स यह है कि बच्चों को आप सिखाने के लिए नई पेरेंटिंग स्किल्स को सीखिए, अपने इमोशंस को कंट्रोल करिए, अल्टरनेटिव चॉइस पर ध्यान दीजिए। किसी भी सिचुएशन को आप calm होकर खत्म कर सकते हैं तो जो प्रॉब्लम बड़ी हो सकती है, वो अगर ठीक ढंग से डील की जाए तो वो प्रॉब्लम खत्म हो जाती है और बच्चों के साथ आपका रिलेशन काफी अच्छा बनता है।
तो मिलते हैं नेक्स्ट आर्टिकल में, नेक्स्ट टॉपिक के साथ में। कमेंट करके बताइए कि आप लोग क्या टेक्निक्स अपनाते हैं।
FAQ
बच्चों को शारीरिक रूप से शिक्षित करने के तत्काल और दीर्घकालिक प्रभाव क्या होते हैं?
उत्तर: बच्चों को शारीरिक रूप से शिक्षित करना, जैसे कि मारना या थप्पड़ मारना, तत्काल नकारात्मक प्रभाव जैसे बढ़ी हुई हिंसा, डर, और भावनात्मक पीड़ा सहित कई नकारात्मक प्रभावों का हो सकता है। दीर्घकालिक प्रभाव में अध्ययन करते समय सामान्य चिंता आउटकम, आत्म-सम्मान में कमी, और स्वस्थ संबंध बनाने में कठिनाई जैसे परिणाम भी शामिल हो सकते हैं। शोध सुझाव देता है कि शारीरिक दंड एक हिंसा का चक्र भी पैदा कर सकता है, जहां वे बच्चे जो इसे अनुभव करते हैं, वे भविष्य में संकटों को हल करने का एक माध्यम के रूप में हिंसा का उपयोग करने के लिए अधिक संभावनाओं में होते हैं।
बच्चों के भावनात्मक और मानसिक विकास पर मारने का प्रभाव कैसे पड़ता है?
उत्तर: बच्चों को मारने का असर उनके भावनात्मक और मानसिक विकास पर हानिकारक हो सकता है। यह माता-पिता और बच्चे के बीच विश्वास को नष्ट कर सकता है, जिससे वे नाराजगी, गुस्सा, और असुरक्षा की भावना को अनुभव कर सकते हैं। शारीरिक दंड का सामना करने वाले बच्चे चिंता या अवसाद विकसित कर सकते हैं, और वे स्व-नियंत्रण और भावनात्मक अभिव्यक्ति में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा, जो बच्चे शारीरिक दंड का शिकार होते हैं, वे हिंसा को संघर्षों को हल करने का एक स्वीकृत तरीका मानकर ले लेते हैं।
बच्चों को मारने के बजाय अधिक प्रभावी विधियां नियमन हैं?
उत्तर: हां, कई वैकल्पिक नियमन विधियां हैं जो अधिक प्रभावी हैं और सकारात्मक माता-पिता और बच्चे के संबंध को बढ़ावा देती हैं। सकारात्मक प्रोत्साहन, जैसे कि अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करना और पुरस्कार प्रदान करना, बच्चों को desirable behaviors में बदलने के लिए प्रेरित करता है। संवेदनशील नियमन तकनीकें, जैसे कि positionality, संवेदनशील सुनवाई, और सहयोग, बच्चों के साथ सकारात्मक संबंध बनाने में मदद कर सकती हैं। सम्मान और समझ के साथ आदान-प्रदान करने से, बच्चों के साथ सही संबंध बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, समस्याओं का सामना करने के लिए अधिक सकारात्मक तरीके हैं, जैसे कि संवाद और समस्याओं को साझा करना, बजाय बच्चे पर शारीरिक दंड या हिंसा का उपयोग करने का।
