Exams के time में बच्चों का stressful होना बहुत normal situation है। अक्सर बच्चों में देखा जाता है कि exam stress की वजह से उनको पेट में या सर में दर्द की शिकायत हो जाती है। कुछ तरह के physical symptoms और anxiety भी उनमे देखी जाती है। Lack of concentration होता हैl कभी कभी वो बहुत low भी feel करते हैं।
Exam Stress के कारण :parentingbyanshu
उनको ऐसा लगता है कि उन्होंने जो preparation की है वो exam के लिए काफी नहीं है। हो सकता है question paper बहुत tough आ जाए। अगर वो fail हो गए तो क्या होगा? Parents का pressure होता है, peer group का pressure होता है, society को कैसे face करेंगे, या फिर career को लेकर कुछ uncertainties हो जाती हैं। ये सब कारण होते हैं कि बच्चे बहुत stressful हो जाते हैं और उनको इन symptoms का सामना करना पड़ता है। parents के लिए भी यह situation बहुत difficult है कि बच्चों को कैसे वह normal रखें और कैसे वह motivate करें कि बच्चों के अंदर यह जो stress की problem है वह exam time में ना रहे। उनको कोई exam का stress भी ना रहे।
Parents and peers का pressure:
Exam Stress को लेकर कई बार parents का pressure होता है कि बच्चे अच्छा perform करें। वो कहीं ना कहीं बच्चों को motivate करने के लिए उनको कहते हैं और बार बार कहते हैं कि तुम ठीक से पढ़ो, अच्छे से पढ़ो। इन सब बातों का कुछ ना कुछ pressure उनपर भी बन जाता है। उनको लगता है कि ये parents की expectation है। इसी तरह से बच्चे भी आपस में competition feel करते हैं। कई बार अच्छे college में admission लेने का एक pressure होता है कि अच्छे marks आए तभी उनका admission हो पाएगा। career में उनको कुछ बनना है तब उनको pressure होता है कि अच्छे marks आऐंगे तभी उनका आगे चलकर अच्छा career बन पाएगा।
कई बार वह अपने खुद के standards भी इतने बना लेते हैं कि उनको कम perform करने पर या कम marks आने में खुद ही खराब महसूस होता है। हमेशा ऐसा नहीं होता है कि parents pressure डालते है लेकिन बच्चों को कई बार खुद भी ऐसी feeling रहती है कि उनका performance काफी अच्छा हो। यह कुछ reasons हैं जिनके कारण बच्चों में एक exam को लेकर fear होता है।
Symptoms
जो symptoms हम देखते हैं वह इसलिए कि जब बच्चों में कोई stress होता है तो कुछ hormones, जो adrenaline और cortisol secrete होने लगते हैं और उसके वजह से यह symptoms भी दिखते हैं जिसमें shortness of breath भी हो सकती है। या stomach disorder हो सकता है, तो ये जो symptoms देखते हैं, ये सब absolutely normal होते हैं। इसके लिए बहुत परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन parents की duty है कि बच्चों को इस समय जब exam होने वाले हैं उनको motivated रखें। ऐसा कहा जाता है कि moderate limit में stress होने से alertness बढ़ जाती है और ज़्यादा preparedness रहती है। वो ज्यादा अच्छा perform कर पाते है।
लेकिन वो जब लाइन cross हो जाती है और वो moderate से high हो जाता है उस समय उनकी performance गिर जाती है क्योंकि उस समय उनका concentration level भी बहुत कम हो जाता है। moderate level का stress तो ठीक है लेकिन उसके beyond नहीं होना चाहिए। parents की duty इस समय यह है कि वह बच्चों से बात करते रहें और उनका stress level भी समझते रहें।
अगर बच्चे बहुत मस्त हैं और उनको कोई stress नहीं है तो वो भी नहीं होना चाहिए क्योंकि जो बिल्कुल stress नहीं लेते हैं और care free होते हैं कई बार उनकी carelessness की वजह से performance कम अच्छी हो जाती है। एक optimum level का stress भी ज़रूरी है। यह समझे कि उनकी mental state क्या है? बच्चों के साथ बात करना parents के लिए सब से ज़्यादा ज़रूरी है। तभी आप उन्हें समझ पाएंगे। बच्चों को बार बार आप बताइए कि उनके किसी भी तरह के performance से आपको कोई problem नहीं होगी। आपको कोई expectation नहीं है ताकि बच्चे इस चीज़ का pressure तो बिल्कुल ना लें।
Stress को कैसे handle करें?
अब अगर आपके बच्चों का stress आपको feel हो रहा है कि वो ज़्यादा सोच रहे हैं। ज़्यादा परेशान हो रहे हैं। आपको उन्हें कैसे समझाना है। सबसे पहले समझना होगा कि इस stress को कैसे handle किया जाए। जब भी कोई adverse situation होती है, यहां exam adverse situation नहीं है लेकिन stress देने वाली situation बन रही है। life में जब भी कोई ऐसी situation आती है तो हम लोग उसका result सोचते हैं कि क्या consequence होगा। जो consequence हम सोचते है वो हमारे अपने believe system की वजह से होता है।
Suppose exam
Suppose exam का stress अगर बच्चे को हो रहा है वह यह सोच रहा है कि अगर मैं fail हो गया तो लोग क्या कहेंगे? Parents क्या कहेंगे? या हमारे friends क्या कहेंगे? या मैं fail हो गया तो मेरा career कैसे बनेगा? मैं क्या करूंगा अगर वो इस तरह से सोच रहा है तो ये उसके negative thoughts हैं। ये उसकी pessimistic approach है। क्योंकि fail होना कम marks आना या किसी भी situation में unsuccessful होने से life खत्म नहीं होती है। Life में बहुत कुछ अलग से भी होता है। और ऐसा नहीं है कि एक ही बार perform करना होता है। आप वही exam दोबारा भी दे सकते हैं। यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है।
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लेकिन बच्चों को यह बात बहुत बड़ी लगती है। उनके मन में यह डर बैठा होता है कि यह दोबारा exam देना पड़े या हमें marks कम आए तो मैं कैसे society, family को कैसे मैं face करूंगा। यह उनके लिए बहुत ज़्यादा negativity लेके आती है तो आपको ये समझना है कि किसी भी adverse situation का जो consequences है वो अपनी belief system से होता है। अगर आप ये सोचते हैं कि किसी भी problem में जब हम होंगे तो उसको हम negatively ना देख के हम उसमें सोचने की कोशिश करेंगे की इसको कैसे ठीक किया जा सकता है। इसके कुछ और भी consequences हो सकते हैं उसको देखने का नज़रिया कुछ और भी हो सकता है।
अगर बच्चे fail होते हैं या कम marks आते हैं तो क्या होगा?
आप उनको फिर से inspire कर सकते हैं कि next class में वो और अच्छे marks लेके आए। इस तरह के जो आप options देंगे वो उनको optimistic बनाने में help करेगा। उनके अंदर फिर से energy आएगी और वह hopeful होकर उस चीज़ को देखेंगे। इस तरह से आपको बच्चों को समझाना है तो उसके लिए पहले आपको इस process को समझना पड़ेगा कि किसी भी life की situation को handle करने के लिए हमारा अपना belief system उस चीज़ को देखने की या life को देखने की approach पर depend करता है। अगर हम exam को optimistic way में देख सकते हैं तो life की हर situation को हम उसी तरह से देख सकते हैं। वह हमारे approach की बात होगी। इस situation में बच्चों को समझाने के लिए आप उनसे बात करिए।
Healthy Lifestyle को अपनाये :
इसके अलावा आप बच्चों को healthy lifestyle follow करने के लिए कह सकते है। Exam के time में भी यह बहुत important है कि वह पूरी नींद लें। अपनी routine में exercise भी शामिल करें और diet में भी उनको घर का बना ताज़ा खाना देना चाहिए। इसका ध्यान रखिए साथ में उनको यह समझाए कि इस समय वह अपनी performance को किसी और से compare ना करें। वह अपना पूरा focus अपनी studies पर दें।
Study Schedule बनवाएं :
उनका study schedule बनाने के लिए encourage करें ताकि जो भिओ बचा हुआ syllabus है वो schedule के हिसाब से उसको properly पढ़ सके। इसमें आप उनकी help करिए कि वो कैसे पढ़े? कितने hours पढ़े? उनको किस तरह से अपने subject को time table और schedule के accordingly खत्म करना है। इसमें अगर आप help करेंगे तो exam तक उनकी पूरी preparation हो जाएगी। उनके साथ में notes बनवाते जाइए जो कि exam के पहले revision में बहुत help करते हैं।
निष्कर्ष :
इस तरह के छोटे छोटे tips देने से बच्चों की preparation better हो जाती है और जो unpreparedness के कारण उनके अंदर stress होता है वह भी दूर हो जाता है। बच्चों के Exam Stress को आप कम कर सकते हैं। चाहे exam आने वाले हो या exam चल रहे हो। Parents का active participation बच्चों की पढ़ाई में उनको बहुत help करता है। आप ध्यान दीजिए कि बच्चे हर तरह से relax feel करें। उनको अच्छा, घर का खाना दीजिए।
अच्छी नींद होनी चाहिए
अच्छी नींद होनी चाहिए। वह बहुत important है। कई बार बच्चे exam time में बहुत जगते हैं। रात में देर तक पढ़ते हैं। उससे performance better नहीं होती है। बल्कि कई बार उससे concentration level कम हो जाता है तो नींद ज़रूरी है उनकी diet sleep और exercise। इस पर आप ध्यान दें और उनके subjects को properly आप भी review करें कि वो सबको बराबर से prepare करते हैं कि नहीं। इनको follow करने से आप देखेंगे कि exam stress बच्चों के अंदर बहुत कम हो गया है। और उनका performance better हो रहा है।
