Stress

stress हमारे लाइफ के हिस्सा बन गया है , जिससे बचना तो मुश्किल है पर हम उससे अपनी लाइफ में कुछ changes करके एफ्फेक्टिवेली हैंडल कर सकते है।

Synopsis

stress शरीर को मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरीकों से प्रभावित कर सकता है। stress होने पर कोर्टिसोल नाम का हार्मोन पूरे शरीर में फैल जाता है।इसके कारण दिल की धड़कन बढ़ जाती है और इसका प्रभाव शरीर और चेतना पर पड़ता है -

आजकल stress हम लोगों की लाइफ का एक unavoidable पार्ट हो गया है। हम सुबह stress के साथ उठते हैं, क्योंकि पूरे दिन हमें बहुत सारे असाइनमेंट करने होते है।इन्हे कैसे पूरा करेंगे,इसी सोच में जल्दी-जल्दी तैयार होते हैं। फिर रोड पर जाना यानी कि ट्रैफिक जाम या बहुत सारे व्हीकल्स होते हैं और हमें अपने डेस्टिनेशन ऑफिस पहुंचने में बहुत टाइम लगता है। एयर पॉल्यूशन, ऑफिस की डेड लाइंस कुछ भी आपका अच्छा नहीं चल रहा है।किसी colleague के साथ में या फिर घर में भी कुछ फैमिली इशूज होते हैं। हेल्थ से रिलेटेड इश्यूज होते हैं।बच्चों के टेंशन होते हैं। एग्जाम का प्रेशर, इतनी सारी प्रॉब्लम्स होती है।

लाइफ में हैंडल करने के लिए बहुत सी चीजें हैं इसलिए आप stress को अवॉइड नहीं कर सकते परंतु बचा जा सकता है।अगर कोई चाहता है कि वह रिलैक्स रहे तो यह भी बहुत मुश्किल है।हम सब यह भी जानते हैं कि stress का हमारी लाइफ में भी बहुत नेगेटिव असर पड़ रहा है।ना सिर्फ मेंटल फिजिकल हेल्थ में भी बहुत असर होता है।यह सब जानने के बाद भी हम इससे दूर नहीं रह पाते हैं। इससे बचने के लिए तरह-तरह के इसके उपाय ढूंढते हैं।उसको अप्लाई भी करने की कोशिश करते हैं लेकिन वो पूरी तरह से नहीं ठीक होता है।

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो की स्ट्रेस होने के बाद भी बहुत मस्त दिखाई पड़ते हैं।यह वह लोग हैं जो अपने stress को ठीक से समझते हैं और उसको हैंडल करना जानते हैं।हम सब भी स्ट्रेस को हैंडल कर सकते हैं क्योंकि आप स्ट्रेंस को दूर नहीं कर सकते हैं।केवल उसको कैसे इफेक्टिवली हैंडल करना है, ये समझ सकते हैं।अब आप ट्रैफिक जाम में बैठे हैं, इरिटेशन हो रहा है, फ्रस्ट्रेशन हो रहा है या कोई चिंता हो रही है,तो आप ट्रैफिक जाम को नहीं दूर कर सकते हैं।लेकिन अपनी इंटेंशंस को कैसे हैंडल करें, वो आप जरूर सीख सकते हैं।

इस article में हम लोग जानेंगे कि stress क्या है, क्यों होता है यह कैसे रिस्पांस करता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।कैसे इसको इफेक्टिवली हैंडल किया जा सकता है?

अपने महसूस किया होगा कि कभी अगर, आप जा रहे हैं रोड पर और एकदम से सामने कोई गाड़ी किसी चीज से टकरा जाए तो आप देखते हैं कि तुरंत बिना टाइम गवाए आप उसमें एक्शन लेते हैं और अपने आप को सुरक्षित कर लेते हैं।इसी तरह से कोई भी लाइव थ्रेटनिंग सिचुएशन होती है तो आप देखते हैं कि विद इन नो टाइम आप एकदम से एक्शन में आ जाते है।

यह कैसे होता है? हम लोग इतना फास्ट एंड क्विक एक्शन कैसे ले लेते हैं?

Stress क्या है ?

किसी भी stress को रेस्पॉन्ड करने में हमारी इनफॉरमेशन threat को समझते ही, वह इनफॉरमेशन हमारे ब्रेन तक पहुंचती है और मैसेज सेंड करते हैं।एड्रेनल ग्लैंड को जो की किडनी में होते हैं, वहां से हार्मोन stress होते हैं जिनको हम कॉमनली स्ट्रेस हार्मोस कहते हैं।यह स्ट्रेस हार्मोस एड्रीनलीन और कॉर्टिसोल, जो हमें उस सिचुएशन से फाइट करने के लिए रेडी करते हैं। यह फंक्शन हार्टबीट को बढ़ा देते हैं।बीटिंग ज्यादा होने से शरीर में ऑक्सीजन फास्ट मिलती है जिसकी वजह से मसल्स मेंटेस हो जाती हैं।

बॉडी में ग्लूकोज ज्यादा क्रिएट होता है तो इसके वजह से हमारे अंदर एकदम से बहुत पावर आ जाती है।हम लोग तुरंत एक्शन लेते हैं। इस सिचुएशन में हमारा बीपी हाई हो जाता है।ब्लड में ग्लूकोज बढ़ जाता है और ब्रीदिंग बढ़ जाती है। हार्ट का पल्पीपटेशन बढ़ जाता है।लेकिन जब वह सिचुएशन दूर हो जाती है तो धीरे-धीरे बॉडी उसको नॉर्मल करती है lऔर हम लोग वापस इस स्टेज में पहुंच जाते हैं कि हमारी ब्रीदिंग नॉर्मल हो जाती है।ब्लड प्रेशर भी नॉर्मल आ जाता है और ग्लूकोज भी नॉर्मल रेंज में हो जाता है।

लेकिन अगर किसी कारण से यह स्ट्रेस continuously होता रहे, डेली सुबह से शाम तक कई बार यह हो रहा है और आप इसको डील नहीं कर पा रहे हैं तो आपकी बॉडी में बार-बार ब्लड प्रेशर पर असर पड़ेगा।स्ट्रेस रिस्पांस किसी थ्रेट को दूर करने के लिए तो बहुत अच्छा है क्योंकि अगर वो नहीं होगा तो हम इतना कोई एक्शन नहीं ले सकते हैं, लेकिन वही रिस्पांस अगर आप लॉन्ग टर्म में देखेंगे तो इसका बॉडी पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ता है ।

हम लोगो को अपने डेली बेसिस पे जितने भी stress हैं, उनको समझना चाहिए और उनका रिस्पांस हम क्या दे रहे हैं वो भी हमें समझना चाहिए।हमें दिन में स्ट्रेस तो नहीं रहता। यदि हमारी बॉडी कंटीन्यूअस इस स्टेज में रहती है तो यह चेक करना चाहिए।हम देखेंगे कि मोस्टली हम लोग बहुत ज्यादा टाइम के लिए स्ट्रेसफुल होते हैं और हम रिलैक्स नहीं कर पाते हैं। और इसका नेगेटिव इफेक्ट, हमारी बॉडी को दिन भर मिलता है।इससे बचने के लिए हमें कोशिश करनी चाहिए ताकि हम अपनी बॉडी को रिलैक्स कर सके।

stress के दुष्प्रभाव :

हर किसी के लिए उसका stress अलग-अलग होता है।कुछ लोगों को ट्रैफिक जाम बहुत बड़ा स्ट्रेस दिखता है।कुछ लोगों को नहीं दिखता है। कुछ लोगों के लिए हेल्थ प्रॉब्लम है।कुछ लोगों के लिए एग्जाम्स का।कुछ लोगों के लिए घर में कोई फैमिली मेंबर बीमार है।उसको देखना बहुत बड़ा स्ट्रेस का कारण हो सकता है।कुछ लोगों के रिलेशनशिप इश्यूज होते हैं। कुछ को गुस्सा बहुत आता है।

इस वजह से स्ट्रेस होता है तो इस स्ट्रेस की रीजंस बहुत सारे हैं, लेकिन वह हम लोग के डेली बेसिस में थ्रेट चलते रहते हैं।हम देखते हैं कि हमारा शॉर्ट टर्म के लिए स्ट्रेस रिस्पांस हमारे लिए बेनिफिशियल है क्योंकि वह हमें फिजिकल डेंजरस से बचाता है।लेकिन यही स्ट्रेस जब लॉन्ग टर्म पर हमारे साथ रहता है तो इसका नेगेटिव इंपैक्ट भी पड़ता है। स्ट्रेस केवल फिजिकल नहीं होते।हमारे इंटरनल भी होते हैं जैसे कि ऑफिस में अगर आपको कोई डेड लाइन है या परफॉर्मेंस बेटर देना है।कोई प्रेजेंटेशन है या बच्चों को जिस तरह से स्ट्रेस हो रहा है।आजकल एग्जाम का टाइम है तो इस समय एक ऑप्टिमल लेवल तक का स्ट्रेस अच्छा होता है क्योंकि उससे उनका परफॉर्मेंस बेटर होता है।

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आपने देखा होगा कि कुछ लोग बिल्कुल मस्त होते हैं।उनको किसी भी तरह का कोई टेंशन नहीं होता हैं। वह बहुत अच्छा परफॉर्म भी नहीं कर पाते हैं l उन्हें कुछ छोटी-छोटी प्रॉब्लम्स भी फेस करनी पड़ती है।जैसे वह कई बार लेट हो जाते हैं और यह उनका परफॉर्मेंस प्रेजेंटेशन के समय उतना अच्छा नहीं हो पता है।उन लोगों काम अच्छा होता है जो कि थोड़ा सा प्रिपेयर करके आते हैं क्योंकि प्रिपेयर वही करेगा जिसको थोड़ा स्ट्रेस होगा।थोड़ा सा स्ट्रेस एक ऑप्टिमल लेवल के नीचे का स्ट्रेस आपकी परफॉर्मेंस को इंप्रूव करता है, लेकिन वही स्ट्रेस लेवल के beyond हो जाए तो फिर इसका नेगेटिव इफ़ेक्ट पड़ता है।आपका परफॉर्मेंस और अधूरा हो जाता है। आप बहुत परेशान हो जाते हैं।

जब तक उस स्टेज में रहेंगे तब तक परफॉर्मेंस बेटर नहीं हो सकता हैl हमें लाइफ में कितना स्ट्रेस होना चाहिए और कितना नहीं होना चाहिए।दोनों के बीच का डिफरेंस भी मालूम होना चाहिए। जो चीज हमें बेटर कर रही है, परफॉर्मेंस हमारा इंप्रूव कर रही है उसे हमें फॉलो करना चाहिए।अचानक आए किसी थ्रेट को हैंडल करने के लिए, हमें रेडी कर देती है और बाद में उसे स्ट्रेस रिस्पांस को नॉर्मलाइज भी करती है।

लेकिन डे टू डे बेसिस पे जो हम लोग प्रॉब्लम्स को फेस करते हैं, डिफरेंट इश्यूज को फेस करते हैं उसके लिए बॉडी हमारे डिस्टिंग्विश नहीं कर पाती है कि यह कौन सा रिस्पांस है।ये अचानक आने वाला रिस्पांस है या फिर रेगुलर बेसिस पे है तो बॉडी का रिस्पांस सिमिलर होता है।यानी कि जब हम किसी प्रॉब्लम को फेस कर रहे हैं जैसे कि हमें ऑफिस की कोई डेट लाइन है।

यह हमारा कंप्यूटर खराब हो गया है।यह किसी तरह का मेडिकल इशू है और हमने टेस्ट कराया रिजल्ट आने वाला है। उसका रिपोर्ट आने वाली है। एग्जाम का रिजल्ट आने वाला है तो उसको लेकर हमारा मन स्ट्रेसफुल रहता है।उस सिचुएशन में भी हमारी बॉडी का वही रिस्पांस रहता है।यानी कि हार्ट का टेंप्टेशन बढ़ गया। हमारी ब्रीथिंग बढ़ जाती है। नॉर्मल नहीं रहती है और हमारी मसल्स टेंस रहती हैं।ब्लड में ग्लूकोज बढ़ जाता हैं।

बीपी भी बढ़ जाता है तो जब हमें कंटीन्यूअस ये चीज हम बॉडी को देते रहेंगे तो वो हमें इस स्टेट में ही रख देगी और इस स्टेट में ज्यादा देर रहने का मतलब है कि हमारी फिजिकल हेल्थ पर डायरेक्टली असर पड़ेगा।इमोशनल एंड मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है और फिजिकल हेल्थ में भी पड़ता है।हमें इसके लिए समझना चाहिए कि हम इस स्टेट से कैसे बाहर आ सकें।अपने आप को और बॉडी को रिलैक्स कर सके।

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Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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