अध्याय 1-सेल्फ क्रिटिकल होने से कैसे बचे

आत्म-आलोचना एक आदत  या फिर कहे सोच  है जिसमें लोग खुद को नकारात्मक और निराशावादी मानते हैं। एक बार जब कोई घटना उनके प्रतिकूल हो जाती है, तो वे सोचते हैं उनके साथ हमेश ऐसा ही होगा। तो ऐसे लोगों को आत्म-आलोचनात्मक कहा जाता है और इस प्रवृत्ति को आत्म-आलोचना कहा जाता है।

यदि आप इसके मूल कारण को समझना चाहते हैं, तो हमें समझना होगा की उनका पालन पोषण कैसे और किन परिस्थति में हुआ। कभी-कभी कुछ माता-पिता जरूरत से ज्यादा strict होते  हैं और हमेशा  बच्चों की गलतियों को notice  करते हैं और उन्हें टोकते रहते है। उनकी परवरिश में न तो कोई सौम्यता होती है है और न ही कोई दया। उनका यह व्यव्हार बच्चो के अंदर हीन  भावना पैदा हो जाती है। 

 और उन्हें लगता है की वह कभी भी कुछ ठीक नहीं कर सकते। 

न केवल माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्य, शिक्षक या मित्र भी बच्चों के इस तरह के व्यवहार के लिए जिम्मेदार हो सकते है। 

self -criticism के कारण लोग हमेशा किसी न किसी बात को लेकर तनाव में रहते हैं। इनका आत्मविश्वास इतना कम होता है वह कोई भी रिस्क नहीं ले पाते। वो ज्यादा कोशिश ही नहीं करते जिससे उनके calibre और skills को बहार आने का मौका ही नहीं मिल पता। इसलिए बच्चों को comment करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए। 

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