अपने अतीत में हुए दुखों को कैसे भुलाएं

Synopsis

अपने वर्तमान को महत्व दे - जब आप अपने में present में व्यस्त होंगे तो अपने आप ही आप अतीत को भूल जाएंगे। क्योंकि अतीत की यादें हमें परेशान करती है, विचलित करती है, जो हमें कभी आगे नहीं बढ़ने देंगी।

हम सभी अपने जीवन में कभी न कभी दूसरों से hurt होते हैं। ऐसा शायद ही किसी के साथ हो कि कभी किसी ने hurt न किया हो। जीवन हमेशा सरल नहीं होता और न ही आसान होता है।
जब हम किसी से दिली तौर पर hurt होते हैं तो हम उससे माफ़ी मांगने की उम्मीद करते है। और हम चाहते हैं कि उसे यह एहसास हो कि उसने जो भी किया वह गलत था। और जब उसका व्यव्हार हमारे सोचे अनुसार नहीं होता तो हम अपने दुःख का कारण उसे ही मान लेते है।
दूसरों को दोष देने से हम अपने आप को लाचार बना लेते है। उदाहरण के लिए, यदि उस व्यक्ति से शिकायत करने पर वह जवाब देता है,
“नहीं, मैंने आपको हर्ट नहीं किया है ,” या
वह कहता है , “तो क्या हुआ? अगर मैंने आपको चोट पहुंचाई तो क्या हो गया “
या वह कहें, ‘चलो ,अब इसे भूल भी जाओ।”
उसकी यह प्रतिक्रिया हमे गुस्से एवं खिझलाहट से भर देती है।
जो लोग उसी दर्द के साथ जीते रहते है, वह उससे उबर नहीं पाते और इसी में “फंस” के रह जाते है। यह किसी के लिए ठीक नहीं है। यह हमारे तनाव को बढ़ाता है, और यह हमारी ध्यान, अध्ययन और काम करने की क्षमता को नुकसान पहुंचाता है। यह हमारे दूसरे रिश्तो को भी प्रभावित करता है।
संक्षेप में, हमें अपने अतीत की चोट को इस तरह से लेना चाहिए जिससे हमारे आने वाले समय या हमारे अन्य रिश्तों पर इसका कोई बुरा प्रभाव न पड़े।

आइए जानें-

आप किस तरह से अतीत के दुखों को छोड़ आगे बढ़ सकते हैं?

तो इसके लिए सबसे पहले अपनी भावनाओं पर काबू पाने के लिए सबसे पहले खुद से कुछ सवाल पूछें।

1 अतीत में हुए दुखों को भुलाने के लिए ध्यान दें मैं वास्तव में अभी क्या महसूस कर रहा हूँ?


अधिकतर देखा जाता है कि निम्नलिखित कुछ ऐसी भावनाएं हैं जिन्हें आप महसूस करते हैं।
क्रोध
शून्यता
निराशा
बेबसी
डर
अपराध
अकेलापन
डिप्रेशन
अभिभूत
क्रोध
असफलता
उदासी
ईर्ष्या द्वेष

तो सबसे पहले आप उन भावनाओं को टिक करें जिन्हें आप महसूस करते हैं। और उसके बाद, स्वयं से पूछें कि,

2 मैं ऐसा क्यों महसूस कर रहा हूँ?

पीर अपनी भावना को समझकर , अपने दर्द को दूसरों के साथ बाँटिये। चाहें अपनी भावनाओं को लिखकर या किसी के साथ शेयर करे। इससे आप अपने दुःख को कम कर सकते हैं। कभी कभी बात करने से आपको अपनी समस्या का हल मिल जाता है या फिर दर्द का कारण भी पता चल जाता है।

3 अतीत में हुए दुखों को भुलाने के लिए उसके बाद सोंचे कि क्या यह भावना उचित है?

हम काले और गोरे लोगों की दुनिया में नहीं रहते हैं, तब भी कभी-कभी भेद भाव का अनुभव होता है। आप अपने दुखो के लिए पूर्णरूप से जिम्मेदार न सही पर कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। अपने अतीत के अनुभव से सीख लेकर अपने भविष्य में परेशानी बचाव के रूप में इस्तेमाल कर सकते है। अपने अतीत को अपने ऊपर हावी न होने दे बल्कि उससे ऊपर उठ कर भविष्य की चुनौतियों को स्वीकार करें ।

अपने वर्तमान को महत्व दे – जब आप अपने में present में व्यस्त होंगे तो अपने आप ही आप अतीत को भूल जाएंगे। क्योंकि अतीत की यादें हमें परेशान करती है, विचलित करती है, जो हमें कभी आगे नहीं बढ़ने देंगी। तो अपने अतीत को भूलकर वर्तमान पर focus करिये, खुश रहिये और अपने आस पास रहने वालो को भी खुश रखिये।
याद रखें, अगर हम अपने मन – और जीवन – को आहत भावनाओं से भर दें, तो कुछ भी सकारात्मक सोचने के लिए जगह नहीं बचेगी । पुराणी दर्द भरी भावनाओं में बने रहना एक ऐसा विकल्प है जिसे आप अपने जीवन में एक स्वागत योग्य आनंद के बजाय आहत महसूस करना जारी रखने के लिए कर रहे हैं।

4 आपको खुद को दुखी रखना और पीड़ित महसूस करना अच्छा लगने लगता है –

शायद आपको यकीं न हो कि कभी-कभी खुद को पीड़ित मानना लोगो को अच्छा लगने लगता हैं। लोगो की sympathy उन्हें अच्छी लगती है। परन्तु सच्चाई इससे अलग है।दूसरों को आपकी भावनाओ की कोई क़द्र नहीं है, आपकी भावनाएं आपकी अपनी है जिसकी जिम्मेदारी भी पूर्णरूप से आपकी ही है।
इसलिए, लोगो को माफ़ करना सीखें। उन सभी लोगों को माफ़ करें जो लोग हमारे साथ बुरा व्यवहार करते हैं और हमें चोट पहुँचाते हैं। इससे हमें दर्द से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
क्षमा का मतलब यह नहीं है कि आपको उनके द्वारा किए गए कार्यों से सहमत होना होगा। क्षमा करना कमजोरी का लक्षण नहीं है। इसके बजाय, इसका सीधा सा मतलब है कि आप एक दयालु व्यक्ति हैं।
क्षमा आपको एक परिपक्व व्यक्ति बनाती है। और जब आप दूसरे व्यक्ति के साथ सहानुभूति रखते हैं और चीजों को उनके दृष्टिकोण से देखने की कोशिश करते हैं, तो यह आपके जीवन की दृष्टि को विस्तृत करता है।
और खुद को माफ करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कभी-कभी हम स्थिति या चोट के लिए खुद को दोषी ठहरा सकते हैं। अगर आप खुद को माफ नहीं कर सकते तो आप शांति और खुशी से नहीं रह पाएंगे।

5. अगर कोई और इस स्थिति में हो और वह आपकी तरह की प्रतिक्रिया दे तो आप उसे क्या सलाह देंगे?

अतीत जो बीत चुका है , उसे बदला नहीं जा सकता।

तो अतीत में ठहरने की बजाये आगे बढ़े। जो आप बदल नहीं सकते उसकी जगह आप उन चीजों को अपनाएं जिन्हे आप बदल सकते हैं तो यह बदलाव सकारात्मक होगा। क्या आप जानते हैं कि आपके पास life में बहुत से options है, तो उन पर ध्यान दे।

अच्छे और बुरे पलों में से अच्छे पल चुनें

आपके पास इस बात का विकल्प होता है कि आप दूसरे व्यक्ति के कार्यों के बारे में बुरा महसूस करते रहें या अन्य सकारात्मक चीजों के बारे में अच्छा महसूस करना शुरू करें। आपको अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेना चाहिए। यह हक़ किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंपना चाहिए।

आप उस व्यक्ति को इतना महत्व ही क्यों देते हैं जिसने आपको हर्ट किया है

कोई भी पिछली समस्या किसी रिश्ते को ठीक नहीं कर सकती  बल्कि वर्तमान को बर्बाद कर देती है। तो क्यों इतने सारे विचारों में लिप्त हों और उस व्यक्ति को इतनी importance क्यों दे जिसने आपके साथ गलत किया  है।

अतीत में हुए दुखों को भुलाने के लिए अपने लिए सकारात्मक मंत्र लिखे और याद रखे –


आपको एक सकारात्मक मंत्र बनाना चाहिए जो आपको भावनात्मक हर्ट के समय शक्ति प्रदान करे।
उदाहरण के लिए,
‘मेरे साथ यह दुर्भाग्यपूर्ण बात क्यों हुई?’ कहने के बजाय।
एक सकारात्मक मंत्र का प्रयास करें जैसे “मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे जीवन में एक नया रास्ता मिला, जो मेरे लिए अच्छा है।”


निष्कर्ष

उपरोक्त मामले से निम्नलिखित निष्कर्ष इस प्रकार हैं-


1 आपका अतीत बीत चुका है और उस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं है, इसलिए अपने वर्तमान पर ध्यान दें।
2 अपने जीवन में सभी सकारात्मक चीजों पर ध्यान दें और उसी के लिए आभारी रहें।
3 अपने दैनिक जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें
4 लोगों को क्षमा करना सीखें क्योंकि कोई भी पूर्ण नहीं है
5 अंतिम लेकिन कम से कम नए शौक विकसित करें, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं और आत्म सुधार पर ध्यान दें।


यदि आप पाते हैं कि उपरोक्त समाधान तार्किक हैं और उनका पालन किया जाना चाहिए, तो आपको उनका पालन करना चाहिए। विभिन्न जीवन स्थितियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने से आप पिछले अनुभवों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम होंगे।

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Anshu Shrivastava

Anshu Shrivastava

मेरा नाम अंशु श्रीवास्तव है, मैं ब्लॉग वेबसाइट hindi.parentingbyanshu.com की संस्थापक हूँ।
वेबसाइट पर ब्लॉग और पाठ्यक्रम माता-पिता और शिक्षकों को पालन-पोषण पर पाठ प्रदान करते हैं कि उन्हें बच्चों की परवरिश कैसे करनी चाहिए, खासकर उनके किशोरावस्था में।

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